भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( १८६ ) माधवनिदान । अथाश्मरीरोगनिदानम् । वातपित्तकफैस्तिस्रश्चतुर्थी शुक्रजाऽपरा । प्रायः श्लेष्माश्रयाः सर्वा अश्मर्यः स्युर्यमोपमाः ॥ १ ॥ वात, पित्त, कफ इनसे ३, चौथी शुक्रसे अश्मरी (पथरी) रोग होय है यह पथरी विशेषकरके कफाश्रित है । " यमोपमा" कहिये अच्छी चिकित्सा न होय तो ये अवश्य प्राणनाशक हैं ॥ अश्मरीकी सम्प्राप्ति । विशोषयेद्वस्तिगतं सशुकं मूत्रं सपित्तं पवनः कफं वा । यदा तदाऽश्मर्युपजायते च क्रमेण पित्तेष्विव रोचना गोः ॥२॥ जिस मनुष्योंका वायु बस्तिमें प्राप्त हुआ, शुक्रयुक्त अथवा पित्तयुक्त मूत्र अथवा कफको सुखावे तब उस स्थानमें पथरी प्रगट होती है, जैसे गऊके पित्तमें गोरोचन जमे है उसी प्रकार बस्तिमें वीर्यसे पथरी होय ॥ अश्मरीका पूर्वरूप । नैकदोषाश्रयाः सर्वा अश्मर्याः पूर्वरक्षणम् । बस्त्याध्मानं तदासन्नदेशेषु परितोऽतिरुक्॥ मूत्रे बस्तसगन्धत्वं मूत्रकृच्छ्रं ज्वरोऽरुचिः ॥ ३ ॥ सब अश्मरी ( पथरी ) एक दोषके आश्रय नहीं हैं अर्थात् अनेक दोषाश्रित हैं बस्तिका फूलना, बस्तिके आसपास अत्यन्त पीडा होनी, मूत्रमें बकरेके पेशाबकीसी दुर्गन्ध आवे, मूत्रकृच्छ्र, ज्वर, अरुचि ये पथरीके पूर्वरूप जानने ॥ पथरीके सामान्य लक्षण । सामान्यलिङ्गं रुङ्नाभिसेवनीबस्तिमूर्धसु । विशीर्णधारं मूत्रं स्यात्तया मार्गे निरोधिते ॥ ४ ॥ तद्व्यपायात्सुखं मेहेदच्छगोमेद- कोपमम् । तत्संक्षोभात्क्षते सास्त्रमायासाच्चातिरुग्भवेत् ॥ ५ ॥ नाभि सेवनी (अण्डकोशके समीपका सीमनका भाग) और बस्तिका अग्र- भाग इनमें शूल होय, पथरीके योगसे मूत्रमार्ग रुकनेसे मूत्रकी धार फटी निकले, पथरी मूत्रमार्गके पाससे हट जाय तौ मूत्र अच्छी रीतिसे उतरे और स्वच्छ गोमेद मणिके समान होय, अश्मरी (पथरी) के योगसे बस्तिमें घाव होनेसे रुधिर मिला मूत्र उतरे, और मूतते समय जोर करनेसे बडा क्लेश और पीडा होय ये सामान्य लक्षण जानने ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA