माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १८७) वातकी पथरीके लक्षण । तत्र वाताद् भृशं चार्तो दन्तान्खादति वेपते । मथ्नाति मेहनं नाभिं पीडयत्यनिशं क्वणन् ॥ ६ ॥ सानिलं मुञ्चति शकृन्मुहुर्मेहति बिन्दुशः । श्यावा रूक्षाऽश्मरी चास्य स्याच्चिता कण्टकैरिव ॥ ७ ॥ वायुकी पथरीसे रोगी अत्यन्त पीडा करके व्याप्त होय, दांतोंको चबावे, कांपे, लिंगको हाथसे रगडे, नाभिको रगडे और रातदिन दुःखसे रोवे और मूत्र आनेके समय पीडा होनेके कारण अधोवायुका परित्याग करे, मूत्र वारम्वार टपक २ गिरे, उसके पथरीका रंग नीला और रूखा होय, उसके ऊपर कांटे होयँ ॥ पित्तकी पथरीके लक्षण । पित्तेन दह्यते बस्तिः पच्यमान इवोष्मवान् । भल्लातकास्थिसंस्थाना रक्ता पीता सिताऽश्मरी ॥ ८ ॥ पित्तकी पथरीके रोगीके बस्तिमें दाह होवे और क्षारसे जैसा दाह होय ऐसी वेदना होय, बस्तिके ऊपर हाथ धरनेसे गरम मालूम होय और भिलावेकी मींगीके समान होय, लाल, पीली, काली होय ॥ कफकी पथरीके लक्षण । बस्तिर्निस्तुद्यत इव श्लेष्मणा शीतलो गुरुः । अश्मरी महती श्लक्ष्णा मधुवर्णाथवा सिता ॥ ९ ॥ कफकी पथरीसे वस्तिमें सुई चुभनेकीसी पीडा होय, शीतलपना होय और पथरी बडी मुर्गीके अण्डेसमान, चिकनी और मद्य ( दारू ) के रंगकीसी अर्थात् कुछ पीली सफेद हुईसी होय ॥ यह कफकी पथरी बहुधा बालकोंके होती हैं सो कहे हैं- एता भवन्ति बालानामेषामेव च भूयसा । आश्रयोपच्याल्पत्वादग्रहणाहरणे सुखा ॥ १० ॥ पूर्वोक्त त्रिदोषज अश्मरी ( पथरी ) विशेषकरके बालकोंके होती है, भूयसा इस षद्के कहनेसे त्रिदोषज अश्मरी बालकोंके अतिरिक्त वडोंके भी होती है, कारण उनका भारी मीठा शीतल चिकना आहार है और उनकी वस्ति छोटी तथा पुष्टता थोडी होय है, इसीसे वैद्योंको उसका चीरना फाडना काटना निकालना कठिन नहीं होय सो सुश्रुतने भी कहा है ॥