माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( २०१ ) शुष्ककासोऽङ्गमर्दोऽधो गुरुता मलसंग्रहः ॥ ६ ॥ श्यावारुणत्वगादित्वमकस्माद्वृद्धिहासवत् । सतोदभेदमुदरं तनुकृष्णशिराराततम् ॥ ७ ॥ आध्मातदृतिवच्छब्दमाहतं प्रकरोति च । वायुश्चात्र सरुक्छब्दो विचरेत्सर्वतो गतिः ॥ ८ ॥ वातोदरमें हाथ, पैर, नाभि और कूर्ख इनमें सूजन होय, सन्धियोंका टूटना, तथा कूर्ख, पसवाडे, पेट, कमर, पीठ इनमें पीडा, सूखी खांसी, अंगोंका टूटना, कमरसे नीचेके भागमें भारीपना, मलका संग्रह होना, त्वचा नख नेत्रादिकका काला लाल होना, पेट अकस्मात् ( निमित्तके बिना ) बडा हो जाय, अथवा छोटा हो जाय, सुई चुभानेकीसी तथा नोचनेकीसी पीडा होय, पेटमें चारोंतरफ बारीक काली शिराओं ( नाडियों ) से व्याप्त होय, चुटकी मारनेसे फूली पखालके समान शब्द होय । इस उदरमें वायु चारों तरफ डोलकर शूल करे तथा गूँजे ॥ पित्तोदरके लक्षण । पित्तोदरे ज्वरो मूर्च्छा दाहस्तृट् कटुकास्यता । भ्रमोऽतिसारः पीतत्वं त्वगादावुदरं हरित् ॥ ९ ॥ पीतताम्रशिरानद्धं सस्वेदं सोष्म दह्यते । धूमायते मृदुस्पर्शं क्षिप्रपाकं प्रद्रूयते ॥ १० ॥ पित्तके उदररोगमें ज्वर, मूर्च्छा, दाह, प्यास, मुखमें कडुआट, भ्रम, अतिसार, त्वगादिक ( नख नेत्र ) इनमें पीलापना, पेट हरा होय, पीली तामेकी नाडियोंसे उदर व्याप्त हो, पसीना आवे, गरमीसे सब देहमें दाह होय, आंतोंसे धूँआंसा निकलता दीखे, हाथके स्पर्श करनेसे नरम मालूम हो, शीघ्र पाक होय अर्थात् जलोदरत्वको प्राप्त होय और उसमें घोर पीडा होय ॥ कफोदरके लक्षण । श्लेष्मोदरेऽङ्गसदनं स्वापश्वयथुगौरवम् । निद्रोत्क्लेशोऽरुचिः श्वासः कासः शुक्लत्वगादिता ॥ ११ ॥ उदरं स्तिमितं स्निग्धं शुक्लराजीततं महत् । चिराभिवृद्धिकठिनशीतस्पर्शं गुरु स्थिरम् ॥ १२ ॥ कफके उदररोगमें हाथ पैर आदि अंगोंमें शून्यता हो और जकड जाय, सूजन हो, अंग भारी हो जाय, निद्रा आवै, वमन होयगी ऐसी मालूम होय, अरुचि होय,