माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २१६ ) माधवनिदान । अथ गण्डमालानिदानम् । ———— कर्कन्धुकोलामलकप्रमाणैः कक्षांसमन्यागलवंक्षणेषु । मेदःकफाभ्यां चिरमन्दपाकैः स्याद्गण्डमाला बहुभिश्च गण्डैः ॥ १ ॥ मेद और कफ इनसे प्रगट भया कांख, कन्धा, नाड़के पिछाडी मन्या नाडीमें, गलेमें और वंक्षण ( जानुमेद्रूसन्धि ) इन ठिकाने छोटे बेरके बराबर, बड़े बेरके समान, आमलेके समान, ऐसी अनेक प्रकारकी गण्ड होती हैं, वे बहुत दिनमें हौले हौले पकें उनको गण्डमाला कहते हैं ॥ अपचीके लक्षण । ते ग्रन्थयः केचिदवाप्तपाकाः स्रवन्ति नश्यन्ति भवन्ति चान्ये । कालानुबन्धं चिरमादधाति सैवापचीति प्रवदन्ति तज्ज्ञाः ॥ २ ॥ अब गण्डमालाका भेद अपची है उसको कहते हैं—पूर्वोक्त गण्डमालाकी गांठ पके नहीं अथवा पाक होनेसे स्रवे, कोई नष्ट होजाय, दूसरी नवीन उठे ऐसी पीडा बहुत दिन रहे उसको कोई अपची कहते हैं ॥ असाध्य और साध्यके लक्षण । साध्या स्मृता पीनसपार्श्वशूलकासज्वरच्छर्दियुता न साध्या । पूर्वोक्त अपची रोग साध्य है और उसमें पीनस होय, पसवाडोंमें शूल, खांसी, ज्वर, वमन ये होंय तो अपची असाध्य है ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां गण्डमाला ( अपची ) निदानं समाप्तम् ॥ अथ ग्रन्थिनिदानम् । ———— वातादयो मांसमसृक्प्रदुष्टाः सन्दूष्य मेदश्च तथा शिराश्च । वृत्तोन्नतं विग्रथितं तु शोथं कुर्वन्त्यतो ग्रन्थिरिति प्रदिष्टः ॥ १ ॥ अत्यन्त दुष्ट हुए वातादि दोष मांस, रुधिर और मेद, उसी प्रकार शिरा ( नस ) इनको दुष्ट कर ( इस जगह दुष्टका अर्थ वृद्धि करना चाहिये, क्षयरूप न करना चाहिये कारण इसका यह है कि, क्षीण विकारोंकी सामर्थ्य रोग करनेकी नहीं होती है ) गोल ऊंची गांठके समान अथवा कठिन सूजनको उत्पन्न करे उसको ग्रन्थि ( गांठ ) कहते हैं ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA