माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 235, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत। (२१७) वातजग्रन्थिके लक्षण। आयम्यते वृश्च्यति तुद्यते च प्रत्यस्यते मथ्यति भिद्यते च । कृष्णो मृदुर्बस्तिरिवाततश्च भिन्नः स्रवेच्चानिलजोऽस्रमच्छम् ॥ २ ॥ वादीकी गांठ तनेके समान करडी मालूम हो, छीलनेके समान मालूम हो, सुई चुभनेकीसी पीडा होय, मानो गिरा चाहती है, मथनेकीसी पीडा होय, फोडनेकीसी पीडा होय, काला वर्ण हो, नरम हो, बस्तिके समान चौडी और भारी होय और उसके टूटनेसे स्वच्छ रुधिर निकले ॥ पित्तकी ग्रन्थिके लक्षण। दन्दह्यते धूप्यति चूष्यते च पापच्यते प्रज्वलतीव चापि । रक्तः सपीतोऽप्यथवापि पित्ताद्भिन्नः स्रवेद्दुष्टमतीव चास्रम् ॥ ३ ॥ पित्तकी गांठ आगसे भरेके समान अत्यन्त दाह करे, आंतोंसे धूआं निकलतासा मालूम हो, चूष्यते कहिये मानो सिंगी लगायके कोई चूसे है, खार लगानेके सदृश पका मालूम होय, अग्निके समान जलीसी मालूम होय, उस गांठका रंग लाल अथवा किंचित् पीला होय और टूटनेसे उसमेंसे दुष्ट रुधिर बहुत निकले ॥ कफकी ग्रन्थिके लक्षण। शीतो विवर्णोऽल्परुजोऽतिकण्डूः पाषाणवत्संहननोपपन्नः । चिराभिवृद्धिश्च कफप्रकोपाद्भिन्नः स्रवेच्छुक्लघनं च पूयम् ॥ ४ ॥ कफकी ग्रन्थि (गांठ) शीतल, प्रकृति समान वर्ण, (कोई किंचित् विवर्ण हों ऐसे कहते हैं) थोडी पीडा हो अत्यन्त खुजली चले, पत्थरके समान कठिन बडी होय और चिरकालमें बढनेवाली होय, फूटनेसे उसमेंसे सफेद गाढी राध निकले ॥ मेदजग्रन्थिके लक्षण। शरीरवृद्धिक्षयवृद्धिहानिः स्निग्धो महान्कण्डुयुतो गुरुश्च । मेदःकृतो गच्छति चात्र भिन्ने पिण्याकसर्पिःप्रतिमं तु मेदः ॥ ५ ॥ मेदकी ग्रंथि शरीरके बढनेसे बढे और शरीरके क्षीण होनेसे क्षीण होजाय, चिकनी बडी खुजलीयुक्त पीडारहित होय है और जब वह फूट जाय तब उसमेंसे तिल- कल्कके समान अथवा घृतके समान मेदा निकले ॥ शिराजग्रन्थिके लक्षण। व्यायामजातैरबलस्य तैस्तैराक्षिप्य वायुस्तु शिराप्रतानम् । संकुच्य संपीड्य विशोष्य चापि ग्रन्थि करोत्युन्नतमाशु वृत्तम् ॥ ६ ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA