माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( २३१ ) जिसका घाव कबूतरके रंगसदृश होय और जिसमें क्लेद न बहता होय और घाव स्थिर हो, जिसमें फुन्सीसी मालूम हों उसको वैद्य जाने कि, यह व्रण ( घाव ) स्थिर भरनेवाला है ॥ जो व्रण भरगया हो उसके लक्षण । रूढवर्त्मानमग्रंथिमशूनमरुजं व्रणम् । त्वक्सवर्णं समतलं सम्यग्रूढं तमादिशेत् ॥ ११ ॥ जिसका मार्ग भरगया होय, गांठ रहित होय, सूजन और पीडा जिसमें नहीं होय, त्वचाके समान वर्ण होगया हो, घावका गढेला भरकर बराबर हो गया हो वह व्रण उत्तम भरा जानना ॥ व्याधिविशेषकरके व्रण कृच्छ्रसाध्य होता है सो कहते हैं- कुष्ठिनां विषजुष्टानां शोषिणां मधुमेहिनाम् । व्रणाः कृच्छ्रेण सिध्यन्ति येषां चापि व्रणे व्रणाः ॥ १२ ॥ कोढी पुरुष, विषवाला पुरुष, क्षयीरोगवाला, मधुमेही पुरुष ऐसोंका व्रण बड़े कष्टसे साध्य होता है और जिसके पहले व्रणमें व्रण प्रगट होय, उसके ये व्रण कष्टसाध्य होते हैं ॥ साध्यासाध्य लक्षण । वसां मेदोऽथ मज्जानं मस्तुलुङ्गं च यः स्रवेत् । आगन्तुजो व्रणः सिध्येन्न सिध्येद्दोषसंभवः ॥ १३ ॥ जिस व्रणमेंसे चर्बी, मेद, मज्जा और बस्तिस्नेह ये बहें वह व्रण आगन्तुज होय तो साध्य है और दोषकृत होय तो साध्य नहीं होय ॥ असाध्यव्रणके लक्षण । मद्यागुर्वाज्यसुमनःपद्मचन्दनचम्पकैः । सुगन्धा दिव्यगन्धाश्च मुमूर्षूणां व्रणाः स्मृताः ॥ १४ ॥ मद्य, अगर, घृत, फूल, कमल, चन्दन और चम्पाके फूलके समान अथवा चमत्कारी पारिजात आदि फूलकीसी गन्ध जिस व्रणमेंसे आवे यह व्रण मरनेवाले रोगीके जानना ॥ दूसरे असाध्य लक्षण । ये च मर्मस्वसंभूता भवन्त्यत्यर्थवेदनाः । दह्यन्ते चान्तरत्यर्थं बहिःशीताश्च ये व्रणाः ॥ १५ ॥ दह्यन्ते बहिरत्यर्थं भवन्त्यंतश्च शीतलाः ।