भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 260

( २४२ ) माधवनिदान । कफजनाडीव्रणके लक्षण । ज्ञेया कफाद्बहुघनाऽर्जुनपिच्छिलास्त्रा स्तब्धा सकण्डूरुजा रजनीप्रवृद्धा । कफज नाडीव्रणमें सफेद, गाढी, चिकनी राध निकले, खुजली चले, रातमें स्राव बहुत होय ॥ सन्निपातज नाडीव्रणके लक्षण । दाहज्वरश्वसनमूर्च्छनवक्त्रशोषा यस्यां भवन्ति विहितानि च लक्षणानि । तामादिशेत्पवनपित्तकफप्रकोपाद्धोरामसुक्षय- करीमिव कालरात्रिम् ॥ ४ ॥ जिस नाडीव्रणमें दाह, ज्वर, श्वास, मूर्च्छा, मुखका सूखना और पूर्वोक्त लक्षण होय उसको त्रिदोषकोपजन्य नाडीव्रण जानना, इसको भयंकर प्राणनाश करनेवाले कालरात्रिके समान जानना ॥ शल्यज नाडीव्रण । नष्टं कथंचिदनुमार्गमुदीरितेषु स्थानेषु शल्यमचिरेण गतिं करोति । सा फेनिलं मथितमुष्णमसृग्विमिश्रं स्रावं करोति सहसा सरुजं च नित्यम् ॥ ५ ॥ किसी प्रकारसे शल्य (कण्टकादि) उक्तस्थानमें पहुँचकर टूट जाय तो नाडी- व्रणको उत्पन्न करे, उस नाडीव्रणमेंसे झाग मिला तथा रुधिरयुक्त मथेके समान गरम नित्य राध बहे तथा पीडा होय ॥ साध्यासाध्य लक्षण । नाडी त्रिदोषप्रभवा न सिध्येच्छेषाश्चतस्रः खलु यत्नसाध्याः ॥ ६ ॥ त्रिदोषजन्य नाडीव्रण साध्य नहीं होय, बाकीके चार नाडीव्रण यत्न करनेसे साध्य होते हैं ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीभाषाटीकायां नाडीव्रणरोगनिदानं समाप्तम् ॥

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