माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( २६९ ) साध्यासाध्य लक्षण । सिद्ध्यन्ति वातकफपित्तकृता विसर्पाः सर्वात्मकः कफकृतश्च न सिद्धिमेति । पित्तात्मकोऽननवपुश्च भवेदसाध्यः कृच्छ्राश्च मर्मसु भवंति हि सर्व एव ॥ २५ ॥ वात पित्त कफ इनसे प्रगट जो विसर्प सो साध्य होय हैं, सन्निपातज और क्षतज विसर्प साध्य नहीं होय, पित्तसे प्रगट भई विसर्प जिसका काजलके समान अंग होय वह असाध्य और जो विसर्प मर्म ठिकानेपर होंय वे सब कष्टसाध्य होते हैं ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरप्रणीतमाधवार्थदीपिकामाथुरीभाषाटीकायां विसर्परोगनिदानं समाप्तम् ॥ अथ विस्फोटकनिदानम् । विस्फोटके लक्षण । कट्वम्लतीक्ष्णोष्णविदाहिरूक्षक्षारैरजीर्णाध्यशनातपैश्च । तथर्तुदोषेण विपर्ययेण कुप्यंति दोषाः पवनादयस्तु ॥ १ ॥ त्वचमाश्रित्य ते रक्तमांसास्थीनि प्रर्दूष्य च । घोरान्कुर्वन्ति विस्फोटान्सर्वाञ्ज्वरपुरःसरान् ॥ २ ॥ कडुआ, खट्टा, तीखा ( मरिचादि ), गरम, दाहकारक, रूखा, खारा, अजीर्ण, भोजनके ऊपर भोजन और धूप, ऋतुदोष कहिये शीतोष्णका अतियोग अथवा ऋतुविपर्यय ( ऋतुका पलटना ) इन कारणोंसे वातादि दोष कुपित हो त्वचाका आश्रय कर रुधिर मांस और हड्डी इनको दूषित कर भयंकर विस्फोट ( फोडे ) उत्पन्न करें उनके होनेके पूर्व घोर ज्वर होय है ॥ विस्फोटकरूप । अग्निदग्घनिभाः स्फोटाः सज्वरा रक्तपित्तजाः । क्वचित्सर्वत्र वा देहे विस्फोटा इति ते स्मृताः ॥ ३ ॥ रक्तपित्तसे प्रगटहुए ऐसे अग्निकरके जरेके समान फोडे अंगमें किसी एक ठिकाने अथवा सब देहमें होते हैं उनके होनेसे ज्वर होय, उनको विस्फोट कहते हैं । इस रोगमें भी वातका अनुबन्ध होता है सो भोजने कहा है ॥ १ यदाह भोजः-“यदा रक्तं च पित्तं च वातेनानुगतं त्वचि । अग्निदग्धनिभान्स्फोटान् कुरुतः सर्वदेहगान् । सज्वरान्सपरीदाहान्विद्याद्विस्फोटकांस्तु तान् ॥ ” इति ।