माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (२७७) मसूरिकाके उपद्रव । मसूरिकान्ते शोथः स्यात्कूर्परे मणिबन्धके । तथांसफलके वापि दुश्चिकित्स्यः सुदारुणः ॥ ३० ॥ मसूरिका (शीतला) के अन्तमें कूर्पर (कोहनी), पहुंचा तथा कन्धा इनमें सूजन होय, (इसको व्यवहारमें गुरु ऐसे कहते हैं) यह चिकित्सा करनेमें कठिन है॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां मसूरिकानिदानं समाप्तम् ॥ अथ क्षुद्ररोगनिदानम् । अजगल्लिकाके लक्षण । स्निग्धा सवर्णा ग्रथिता नीरुजा मुद्गसन्निभा । कफवातोत्थिता ज्ञेया बालानामजगल्लिका ॥ १ ॥ बालकको कफवातसे चिकनी, त्वचाके वर्णके समान वर्ण होय, गांठसी बन्धी रुजा (पीडा) रहित तथा मूंगके सदृश जो पिडिका होय उसको अजगल्लिका कहते हैं ॥ यवप्रख्याके लक्षण । यवाकारा सुकठिना ग्रथिता मांससंश्रिता । पिडिका श्लेष्मवाताभ्यां यवप्रख्येति चोच्यते ॥ २ ॥ कफवातसे प्रगट, जौके समान कठिन, गांठके सदृश मांसमिश्रित जो पीडिका होय उसको यवप्रख्या कहते हैं भोजके मतसे इसीको अन्त्रालजी कहते हैं ॥ अन्त्रालजीके लक्षण । घनामवक्त्रां पिडिकामुन्नतां परिमंडलाम् । अन्त्रालजीमल्पपूयां तां विद्यात्कफवातजाम् ॥ ३ ॥ कफवातसे प्रगट, कठिन, जिसमें मुख न हो, तथा ऊंची ऐसी पिडिका होय तथा जिसके चारोंओर मण्डलाकार हो और जिसमें राध थोडी होय, उसको अन्त्रालजी कहते हैं ॥ १ अन्त्रालजी स्नायुगता भोजादवगन्तव्या । यदुक्तम्- "श्लेष्मानिलौ श्रितौ स्नायुं पिडिकां पित्तमण्डलाम् । दुष्टौ जनयतोऽवक्त्रामल्पपूयामकण्डुराम् ॥ आमोदुम्बरसंकाशां विद्यादन्त्रा- लर्जीं तु ताम् ॥" CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA