भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 325

भाषाटीकासमेत । ( ३०७ ) अथ नासारोगनिदानम् । —०-०-०-०-०— पीनसके लक्षण । आनह्यते यस्य विशुष्यते च प्रक्लिद्यते धूप्यति चैव नासा । न वेत्ति यो गंधरसांश्च जन्तुर्जुष्टं व्यवस्येत्स तु पीनसेन ॥ तं चानिलश्लेष्मभवं विकारं ब्रूयात्प्रतिश्यायसमानलिंगम् ॥ १ ॥ जिसकी नाक रुकजाय, वात शोषित कफसे नाक भीतरसे सूखीसी गीली रहे धूआंसा निकले, जिसकी नाकमें सुगंध दुर्गन्ध मिष्ट रसादिककी गन्ध मालूम न हो, उसके पीनस प्रगट भई जाननी, इस वातजन्य विकारको प्रतिश्याय ( पीनस ) कहते हैं ॥ पूतिनस्यके लक्षण । दोषैर्विदग्धैर्गलतालुमूले संमूर्च्छितो यस्य समीरणस्तु । निरेति पूतिर्मुखनासिकाभ्यां तं पूतिनस्यं प्रवदंति रोगम् ॥ २ ॥ गले और तालुएमें दुष्ट भये पित्तरक्तादि दोषकरके वायु मिश्रित होकर नाक और मुखके मार्गोंसे दुर्गन्ध निकले, इस रोगको पूतिनस्य कहते हैं ॥ नासापाकके लक्षण । घ्राणाश्रितं पित्तमरूंषि कुर्याद्यस्मिन्विकारे बलवांश्च पाकः । तन्नासिकापाकमिति व्यवस्येदिक्लेदकोथावथ वापि यत्र ॥ ३ ॥ जिसकी नाकमें पित्त दूषित होकर फुन्सी प्रगट करे और नाक भीतरसे पक- जाय, उसको नासिकापाक कहते हैं, इसमें नाकसे राध बहे और दुर्गंध आवे ॥ पूयरक्तके लक्षण । दोषैर्विदग्धैरथवापि जन्तोर्ललाटदेशेऽभिहतस्य तैस्तैः । नासा स्रवेत्पूयममृग्विभिश्रं तं पूयरक्तं प्रवदन्ति रोगम् ॥ ४ ॥ दोष दुष्ट होनेसे अथवा कपालमें चोट लगनेसे नाकमेंसे राध बहे और रुधिर बहे इस रोगको पूयरक्त कहते हैं ॥ क्षवथु ( छींक ) के लक्षण । घ्राणाश्रिते मर्मणि संप्रदुष्टो यस्यानिलो नासिकया निरेति । कफानुयातो बहुशोऽतिशब्दं तं रोगमाहुः क्षवथुं विधिज्ञाः ॥ ५ ॥ नासिकाश्रित मर्म ( शृङ्गाटकमर्म ) के विषे वायु दुष्ट होकर कफसहित भारी शब्दको नासिकाके बाहर निकाले उसको क्षवथु ( छींक ) कहते हैं ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA