माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ३०६ ) माधवनिदान । परिपोटकके लक्षण । कृष्णारुणनिभः स्तब्धः स वातात्परिपोटकः ॥ १७ ॥ वादीसे काला लाल और कठिन ऐसा फूल जाय, उसको परिपोटक कहते हैं ॥ उत्पातके लक्षण । गुर्वाभरणसंयोगात्ताडनाद्धर्षणादपि । शोथः पाल्यां भवेच्छ्यावो दाहपाकरुजान्वितः ॥ रक्तो वा रक्तपित्ताभ्यामुत्पातः स गदो मतः ॥ १८ ॥ कानमें भारी आभरण ( गहना ) पहननेसे अथवा चोटके लगनेसे अथवा कानको खींचनेसे रक्तपित्त कुपित होकर कानकी पालीमें हरी नीली अथवा लाल सूजन होय उसमें दाह होवे, पीडा होवे और रक्त बहे, इस रोगको उत्पात कहते हैं ॥ उन्मन्थके लक्षण । कर्णं बलाद्वर्धयतः पाल्यां वायुः प्रकुप्यति ॥ १९ ॥ कफं संगृह्य कुरुते सशोफं स्तब्धवेदनम् । उन्मन्थकः सकण्डूको विकारः कफवातजः ॥ २० ॥ कानको बलपूर्वक बढानेसे पाली ( लौर ) में वायु कुपित होकर कफको संग लेकर कठिन तथा मन्द पीडायुक्त सूजनको प्रगट करे, उसमें खुजली चले, इस कफवातजन्य विकारको उन्मन्थक कहते हैं ॥ दुःखवर्द्धनके लक्षण । संवर्ध्यमाने दुर्विद्धे कण्डूदाहरुजान्वितः । शोफो भवति पाकश्च त्रिदोषो दुःखवर्द्धनः ॥ २१ ॥ दुष्टरीतिकरके कानको छेदनेसे तथा बढानेसे खुजली दाह पीडायुक्त ऐसी सूजन होय, वह पकजाय, उसको दुःखवर्द्धन कहते हैं ॥ परिलेहीके लक्षण । कफासृक्कृमिसंभूतः स विसर्पन्नितस्ततः । लिहेश्च शष्कुलीं पालिं परिलेहीत्यसौ स्मृतः ॥ २२ ॥ कफ रक्त कृमिसे उत्पन्न भई तथा सर्वत्र विचरनेवाली ऐसी जो सूजन कानकी पालीमें होय, वह कानकी पालीको खाय जाय अर्थात् उसका मांस झरने लगे उसको परिलेही कहते हैं ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां कर्णरोगनिदानं समाप्तम् ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA