माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३७३ ) ईर्ष्याकनपुंसकके लक्षण । -ईर्ष्यकं शृणु चापरम् ॥ ३ ॥ दृष्ट्वा व्यवायमन्येषाम् व्यवाये यः प्रवर्तते । ईर्ष्यकः स तु विज्ञेयो दृग्योनिरयमीर्ष्यकः ॥ ४ ॥ जो मनुष्य दूसरेको मैथुन करते देख आप मैथुन करे उसको ईर्ष्यक नपुंसक कहते हैं। दूसरा पर्यायवाचक नाम दृग्योनि है। कोई 'दृग्योनिरयमीर्ष्यकः' इस जगह 'षण्ढकं शृणु पञ्चमम्' ऐसा पाठ कहते हैं अर्थात् षण्ढक जो पञ्चम नपुंसक उसके लक्षण सुन ॥ महाषण्ढनपुंसक लक्षण । यो भार्यायामृत्तौ मोहादंगनेव प्रवर्तते । ततः स्त्रीचेष्टिताकारो जायते षण्ढसंज्ञितः ॥ ५ ॥ जो पुरुष ऋतुकालमें मोहसे स्त्रीके सदृश प्रवृत्त होय अर्थात् आप नीचेसे सीधा हो ऊपर स्त्रीको चढाकर मैथुन करे उससे जो गर्भ रहे वह पुरुष स्त्रीकीसी चेष्टा करे और स्त्रीकी आकार होय, स्त्रीकी चेष्टा करे (आप स्त्रीके समान नीचे होकर अन्य पुरुषसे अपने लिंगके ऊपर वीर्य पतन करावे) ॥ नारीषण्ढनपुंसकके लक्षण । ऋतौ पुरुषवद्वापि प्रवर्त्तेताङ्गना यदि । तत्र कन्या यदि भवेत्सा भवेन्नरचेष्टिता ॥ ६ ॥ ऋतुसमय यदि स्त्री पुरुषके सदृश प्रवृत्त होय अर्थात् पुरुषको नीचे सुलाय उसके ऊपर चढ पुरुषके समान मैथुन करे, उस मैथुनसे जो कन्या प्रगट हो वह पुरुषकेसे आकारवान् होय और पुरुषकीसी चेष्टा करे (अर्थात् स्वयं स्त्रीरूप भी होकर दूसरी स्त्रीके ऊपर पुरुषके समान उसकी योनिसे अपनी योनि घर्षण करे) ये षण्ढनपुंसकके दोनों भेद हैं। इससे पांच प्रकारके ही ध्वजभंग नपुंसक जानने परन्तु चरकके मतसे नपुंसक स्त्री पुरुषके भेदसे दो प्रकारका है और जितने पुरुषके नपुंसक भेद हैं उतनेही स्त्रीके जानने ॥ उक्त श्लोकोंका संग्रह । आसेक्यश्च सुगंधी च कुम्भिकश्चैर्ष्यकस्तथा । सरेतसस्त्वमी ज्ञेया अशुक्रः षण्ढसंज्ञितः ॥ ७ ॥ आसेक्य, सुगन्धी, कुंभिक और ईर्ष्यक ये चारों प्रकारके नपुंसक शुक्र (वीर्य) सहित जानने और षण्ढसंज्ञक नपुंसकके वीर्य नहीं होता है वह वीर्यरहित जानना ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA