भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 398

( ३८० ) माधवनिदानका परिशिष्ट । बहे, तथा उस मनुष्यका हृदय और मस्तक दूखे, ज्वर होय, देह जकड जाय, प्यास लगे तथा मूर्च्छा आवे ॥ अनेनान्येऽपि बोद्धव्या व्याला दंष्ट्राप्रहारिणः । शृगालाश्वतराश्वर्क्षद्वीपिव्याघ्रवृकादयः ॥ ४ ॥ इस प्रकार डाढा प्रहार करनेवाले सर्प, स्यार, खच्चर, घोडा, रीछ, चीता, वाघ, भेडिया, आदिशब्दसे सिंह वानर आदि इनके लक्षण भी कुत्तेके समान जानने ॥ सविष निर्विषदंशके लक्षण। कण्डूनिस्तोदवैवर्ण्यसुप्तिक्लेदज्वरभ्रमाः । विदाहरागरुक्पाक- शोफग्रंथिविकुंचनम् ॥ ५ ॥ दंशावदरणं स्फोटाः कर्णिका मण्डलानि च । सर्वत्र सविषे लिंगं विपरीतं तु निर्विषे ॥ ६ ॥ खुजली, नोचनेकीसी पीडा, वर्णका बदलना, शून्यता, क्लेद, ज्वर, भ्रम, दाह लाली, दर्द, पकना, सूजन, गांठ, चोंटनी, काटनेकी जगह चीरा पडे, फोडा, कर्णिका मण्डल असाध्य ये लक्षण सविष दांतके होते हैं। इसके विपरीत लक्षण निर्विषके जानने ॥ असाध्य लक्षण। दष्टो येन तु तच्चेष्टां रुदन् कुर्वन्ति नश्यति । पश्यंस्तमेव चाकस्मादादर्शसलिलादिषु ॥ ७ ॥ जिस प्राणीका काटा हुआ मनुष्य उसी प्राणीकी सब चेष्टा करे और रुदन करे तथा आदर्श (शीसा) पानी आदि पदार्थोंमें उसी प्राणीका प्रतिबिंब देखे वह रोगी मरजाय ॥ जलसंत्रासनामाके लक्षण। योऽद्भ्यस्त्रस्येददृष्टोऽपि शब्दसंस्पर्शदर्शनैः । जलसन्त्रासनामानं दष्टं तमपि वर्जयेत् ॥ ८ ॥ पुरुष पानीके शब्द स्पर्श और अवलोकन (देखने) से डरपे उसको जल- संत्रासनामा कहते हैं। उसको भी वैद्य त्याग देवे ॥ कोई शंका करे कि, जल बिना देखे कैसे मनुष्य डरता है इसवास्ते कहते हैं- अदृष्टस्यापि जन्तोर्हि जलत्रासो भवेद्यदि । तस्यारिष्टं हि विषजं ब्रुवते विषचिन्तकाः । जलं विना जलत्रासो जायते श्लेष्मसंचयात् ॥ ९ ॥ जिस मनुष्यको जलके बिना देखे भय भी लगे, उसको विषज्ञवैद्य विषजरोग कहते हैं। यह जल बिना जलसे त्रास कफके सञ्चयसे होता है सो लिखते हैं ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA