माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ४८ ) माधवनिदान ।
हो पवनका प्रेरित गुदाके मार्गसे बारंबार नीचेको बहुत उतरे तिसको अतिसार कहते हैं । यह भयंकर अतिसार रोग ६ प्रकारका है-वातका १, पित्तका २, कफका ३, ४ सन्निपातका, ५ शोकका और ६ आमातिसार ऐसे छःप्रकारका अतिसार है । द्वंद्वज अतिसार व्याधिस्वभावकरके नहीं होते, चरकमें आमातिसार नहीं कहा । भय और शोकसे दो कहकर संख्या पूरी करी है। और आमातिसारको सन्निपाताति- सारके अन्तर्गत कहा है ॥ यहां माधवाचार्यने भयातिसारकी वातज अतिसारमें गणना करी है ॥ अतिसारके पूर्वरूप । हृन्नाभिपा यूदरकुक्षितोदगात्रावसादानिलसन्निरोधाः । विट्सङ्ग आध्मानमथाविपाको भविष्यतस्तस्य पुरःसराणि॥५॥ हृदय, नाभि, गुदा, पेट, कूख इनमें पीडा हो, शरीरमें फूटनी हो, गुदाका पवन रुकजाय, मलका अवरोध हो अफरा हो और अन्न पचे नहीं ये लक्षण- अतिसाररोग के पूर्वरूपके होते हैं ॥ वातातिसारके लक्षण । अरुणं फेनिलं रूक्षमल्पमल्पं मुहुर्मुहुः । शकृदामं सरुक्शब्दं मारुतेनातिसार्यते ॥ ६ ॥ कुछ ललाईको लिये, झाग मिला तथा रूखा, थोडा थोडा बारम्बार आम मिला हुआ दस्त उतरे और शूल चले तथा मल उतरते समय शब्द होवे तो वाता- तिसार जानना ॥ पित्तातिसारके लक्षण । पित्तात्पीतं नीलमालोहितं वा तृष्णामूर्च्छादाहपाकोपपन्नम् । पित्तसे पीला काला और धूसरे रंगका मल उतरता है तथा तृष्णा मूर्च्छा और सम्पूर्ण शरीर तथा गुदामें दाह होती है, गुदा प चजाती है ये लक्षण पित्तातिसारके हैं ॥ कफातिसारके लक्षण । शुक्लं सांद्रं सकफं श्लेष्मयुक्तं विस्रं शीतं हृष्टरोमा मनुष्यः ॥ ७ ॥ कफातिसारवाले पुरुषका मल सफेद, गाढा, चिकना, कफमिश्रित, दुर्गंधयुक्त और शीतल उतरता है तथा रोम खडे होजाते हैं ये लक्षण कफातिसारके जानने ॥ सन्निपातातिसारके लक्षण । वराहस्नेहमांसाम्बुसदृशं सर्वरूपिणम् । कृच्छ्रसाध्यमतीसारं विद्याद्दोषत्रयोद्भवम् ॥ ८ ॥