भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत। (४९) सूकरकी चरबीसदृश अथवा मांसके धोये हुए पानीके सदृश और वातादि त्रिदोषोंके जो लक्षण कहे हैं उन लक्षणसंयुक्त हो ऐसा यह त्रिदोषजनित अतिसार कष्टसाध्य जानना ॥ शोकातिसारके लक्षण । तैस्तैर्भावैः शोचतोऽल्पाशनस्य बाष्पोष्मा वै वह्निमाविश्य जन्तोः । कोष्ठं गत्वा क्षोभयेत्तस्य रक्तं तच्चाधस्तात्काकणन्तीप्रकाशम् ॥ निर्गच्छेद्वै विडूविमिश्रं ह्यविड़वा निर्गन्धं वा गन्धवद्वातिसारः ॥ ९॥ जिस पुरुषके पुत्र, मित्र, स्त्री, धन इनका नाश होजावे वह उसी उसी वस्तुका शोच करे इसीसे क्षुधा मन्द होनेसे धातुक्षय होय, ऐसे प्राणीके बाष्प (नेत्र नासा गले आदिसे जो शोकद्वारा जल गिरे सो) और ऊष्मा कहिये शोकजन्य देह- तेज ये दोनों बाष्पोष्मा कोठेमें प्राप्त हो अग्निको मन्द कर रुधिरको कुपित करे तब यह रुधिर चिरमिटीके रंगसदृश हुआ गुदाके मार्ग होकर मलयुक्त अथवा मलरहित निकले तथा गन्धयुक्त अथवा गन्धरहित दस्त उतरे उसको शोकातिसार कहते हैं, इसी प्रकार भयातिसार भी जान लेना ॥ शोकातिसारके कृच्छ्रसाध्यत्व लक्षण । शोकोत्पन्नो दुश्चिकित्स्योऽतिमात्रं रोगो वैद्यैः कष्ट एष प्रदिष्टः॥१०॥ शोकसे उत्पन्न हुआ जो अतिसार वह चिकित्सा करनेमें बहुत कठिन है कारण कि, शोक शांत हुए बिना केवल औषधोंसे शांति नहीं होती इससे वैद्योंने यह कष्ट- साध्य कहा है ॥ आमातिसारके लक्षण । अन्नाजीर्णात्प्रद्रुताः क्षोभयन्तः कोष्ठं दोषा धातुसङ्घान्मलांश्च । नानावर्णं नैकशः सारयन्ति शूलोपेतं षष्ठमेनं वदन्ति ॥ ११ ॥ अन्नके न पचनेसे दोष (वात पित्त कफ) अपने मार्गको छोडकर कोठेमें प्राप्त हो कोठेको दूषित कर रक्तादि धातु और पुरीषादि मलको बारबार गुदाके मार्गसे बाहर निकाले और इसका रंग अनेक प्रकारका हो तथा शूलयुक्त दस्त उतरे इसको छठा आमातिसार वैद्य कहते हैं। शंका-प्रथम कहि आये हैं कि, अति- सार रोग छः प्रकारका होता है, पुनः- "षष्ठमेनं वदन्ति" यह पद क्यों धरा ? उत्तर- यह पद नियमके अर्थ माधवाचार्यने सुश्रुतके मतसे संग्रह किया है। हमारे CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA