माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ५२ ) माधवनिदान । प्रवाहिकाकी सम्प्राप्ति । वायुः प्रवृद्धो निचितं बलासं नुदत्यधस्तादहिताशनस्य । प्रवाहतोऽल्पं बहुशो मलाक्तं प्रवाहिकां तां प्रवदन्ति तज्ज्ञाः ॥२२॥ अपथ्य सेवन करनेवाले पुरुषके कुपित हुई जो वात सो संचित हुए कफकों मलसंयुक्त करके बारम्बार गुदाके मार्गसे बाहर निकाले और मरोडाके साथ पीडा हो, थोडा मल कई दफा निकले इसको प्रवाहिका कहते हैं। प्रवाहिका और अति- सार इन दोनोंका एक साधर्म्य है इसीसे अतिसार रोगमें प्रवाहिका कही है। परन्तु अतिसारमें अनेक प्रकारके द्रव धातु निकलते हैं और प्रवाहिकामें केवल कफ निक- लता है. इतना भेद है। इसमें “निचितं बलासम्” यह जो पद कहा अर्थात् कफसे मिलकर सो यह केवल कफका तो उपलक्षण है अर्थात् कफके कहनेसे पित्त और रुधिर भी जानना। भोजने इस रोगका नाम विवसी कहा है, पराशरऋषिने इसको अन्तरग्रन्थी कहा है,हारीत ऋषिने निश्वारक कहा है,कोई आचार्य निर्वाहिका कहते हैं॥ प्रवाहिकाके वातादि भेदकरके लक्षण । प्रवाहिका वातकृता सशूला पित्तात्सदाहा सकफा कफाच्च । सशोणिता शोणितसम्भवा च ताः स्नेहरूक्षप्रभवा मतास्तु। तासामतीसारवदादिशेच्च लिङ्गं क्रमं चामविपक्वतां च॥२३॥ वातकी प्रवाहिकामें शूल होता है, पित्तकी दाहयुक्त, कफकी कफयुक्त और रक्तसे रक्तयुक्त होती है। यह चिकने और रूखे पदार्थ भोजन करनेसे होती है अर्थात् चिकने पदार्थसे कफकी, रूखे पदार्थसे वातकी, तु-शब्द करके तीक्ष्ण और खट्टेपदार्थसे क्रमसे पित्तकी और रुधिरकी होती है ऐसे जानना। इस प्रवाहिकाके लक्षणक्रम आम और पक्वावस्था यह अतिसार निदानके सदृश जानना ॥ अतिसार चला गया होय उसके लक्षण । यस्योच्चारं विना मूत्रं सम्यग्वायुश्च गच्छति । दीप्ताग्नेर्लघुकोष्ठस्य स्थितस्तस्योदरामयः ॥ २४ ॥ जिस मनुष्यको मूत्र करते समय दस्त न होय और अपानवायु जिसकी शुद्ध निकले और अग्नि देदीप्यमान होवे, कोठा हलका होवे उस मनुष्यका अतिसार गया जानिये ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थदीपिकामाथुरीभाषाटीकाया- मतिसाररोगः समाप्तः ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA