भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( ७२ ) माधवनिदान । जिनका आहार परिमाणका है और जो वैद्यविद्याके कहने पर चलते हैं उनको कदाचित् विषूचिका रोग नहीं होय । जो अज्ञानी, जिनकी इंद्रियें वशमें नहीं, जो भोज- नके लालची हैं ऐसे मनुष्योंको यह विषूचिका रोग अवश्य होता है ॥ विषूचिकाके लक्षण । मूर्च्छातिसारो वमथुः पिपासा शूलभ्रमोद्वेष्टनजृम्भदाहाः । वैवर्ण्यकंपौ हृदये रुजश्च भवन्ति तस्यां शिरसश्च भेदः ॥ १४ ॥ मूर्च्छा, अतिसार, वमन, प्यास, शूल, भ्रम, जांघोंमें पीडा जँभाई, दाह, देहका विवर्ण, कम्प, हृदयमें पीडा और मस्तकमें पीडा। ये लक्षण हो उसको विषूचिका कहते हैं । इसीको महामारी अथवा हैजा कहते हैं ॥ अलसकके लक्षण । कुक्षिरानाह्यतेऽत्यर्थं प्रताम्येत्परिकूजति । निरुद्धो मारुतश्चैव कुक्षावुपरि धावति ॥ १५ ॥ वातवर्चोनिरोधश्च यस्यात्यर्थं भवेदपि । तस्यालसकमाचष्टे तृष्णोद्गारौ तु यस्य च ॥ १६ ॥ कूखमें और पेटमें अफरा हो, मोह हो, पीडासे पुकारे, पवन चलनेसे रुककर कूखमें और कण्ठादि स्थानोंमें फिरे, मल मूत्र और गुदाकी पवन रुक, प्यास बहुत लगे, डकार आवे ये लक्षण जिसमें होयँ उसको अलसकरोग कहते हैं ॥ विलम्बिकाके लक्षण । दुष्टं तु भुक्तं कफमारुताभ्यां प्रवर्त्तते नोर्ध्वमधश्च यस्याम् । विलम्बिकां तां भृशदुश्चिकित्स्यामाचक्षते शास्त्रविदः पुराणाः॥ १७ जिस मनुष्यके भोजन करा हुआ अन्न-कफ वात करके दूषित हो, ऊपर नीचे नहीं जाय अर्थात् वमन विरेचन न होय उसको वैद्यविद्याके जाननेवाले जिसकी चिकित्सा नहीं ऐसी विलंबिका रोग कहते हैं । कोई शंका-करे कि, अलसक और विलंबिका इन दोनोंकी वात कफके प्रबल होनेसे ऊपर नीचे प्रवृत्ति होती है । इन दोनोंमें भेद क्या है ? सो कहो । उत्तर-अलसकमें शूल आदि घोरपीडा होती है और विलंबिकामें नहीं होती इतना ही भेद है ॥ अजीर्णसे प्रगट विषूच्यादिको कहकर अजीर्णजन्य आमके दूसरे कार्य्यान्तर कहते हैं- यत्रस्थमामं विरुजेत्तमेव देशं विशेषेण विकारजातैः । दोषेण येनावततं शरीरं तल्लक्षणैरामसमुद्भवैश्च ॥ १८ ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA