भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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विहारार्थं च गतयोः कृष्णयोर्यमुनामनु ॥ १२७ ॥ सम्प्राप्तिश्चक्रधनुषोः खाण्डवस्य च दाहनम् । मयस्य मोक्षो ज्वलनाद् भुजङ्गस्य च मोक्षणम् ॥ १२८ ॥ इसके पश्चात् द्रौपदीके पुत्रोंकी उत्पत्तिकी कथा है। तदनन्तर जब श्रीकृष्ण और अर्जुन यमुनाजीके तटपर विहार करनेके लिये गये हुए थे, तब उन्हें जिस प्रकार चक्र और धनुषकी प्राप्ति हुई, उसका वर्णन है। साथ ही खाण्डववनके दाह, मयदानवके छुटकारे और अग्निकाण्डसे सर्पके सर्वथा बच जानेका वर्णन हुआ है ॥ १२७-१२८ ॥

महर्षेर्मन्दपालस्य शार्ङ्ग्या तनयसम्भवः । इत्येतदादिपर्वोक्तं प्रथमं बहुविस्तरम् ॥ १२९ ॥ इसके बाद महर्षि मन्दपालका शार्ङ्गी पक्षीके गर्भसे पुत्र उत्पन्न करनेकी कथा है। इस प्रकार इस अत्यन्त विस्तृत आदिपर्वका सबसे प्रथम निरूपण हुआ है ॥ १२९ ॥

अध्यायानां शते द्वे तु संख्याते परर्षिणा । सप्तविंशतिरध्याया व्यासेनोत्तमतेजसा ॥ १३० ॥ परमर्षि एवं परम तेजस्वी महर्षि व्यासने इस पर्वमें दो सौ सत्ताईस (२२७) अध्यायोंकी रचना की है ॥ १३० ॥

अष्टौ श्लोकसहस्राणि अष्टौ श्लोकशतानि च । श्लोकाश्च चतुराशीतिर्मुनिनोक्ता महात्मना ॥ १३१ ॥ महात्मा व्यास मुनिने इन दो सौ सत्ताईस (२२७) अध्यायोंमें आठ हजार आठ सौ चौरासी (८,८८४) श्लोक कहे हैं ॥ १३१ ॥

द्वितीयं तु सभापर्व बहुवृत्तान्तमुच्यते । सभाक्रिया पाण्डवानां किङ्कराणां च दर्शनम् ॥ १३२ ॥ लोकपालसभाख्यानं नारदाद् देवदर्शिनः । राजसूयस्य चारम्भो जरासन्धवधस्तथा ॥ १३३ ॥ गिरिव्रजे निरुद्धानां राज्ञां कृष्णेन मोक्षणम् । तथा दिग्विजयोऽत्रैव पाण्डवानां प्रकीर्तितः ॥ १३४ ॥ दूसरा सभापर्व है। इसमें बहुत-से वृत्तान्तोंका वर्णन है। पाण्डवोंका सभानिर्माण, किंकर नामक राक्षसोंका दीखना, देवर्षि नारदद्वारा लोकपालोंकी सभाका वर्णन, राजसूययज्ञका आरम्भ एवं जरासन्धवध, गिरिव्रजमें बंदी राजाओंका श्रीकृष्णके द्वारा छुड़ाया जाना और पाण्डवोंकी दिग्विजयका भी इसी सभापर्वमें वर्णन किया गया है ॥ १३२—१३४ ॥

राज्ञामागमनं चैव सार्हणानां महाक्रतौ । राजसूयेऽर्घसंवादे शिशुपालवधस्तथा ॥ १३५ ॥