भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1023, कुल 2256 में से

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पृष्ठ 1023

जम्बुक उवाच

शृणु मे त्वं महाबाहो यद् वाक्यं मूषिकोऽब्रवीत् । धिक् बलं मृगराजस्य मयाद्यायं मृगो हतः ॥ ३६ ॥ गीदड़ बोला— महाबाहो! चूहेने (तुम्हारे विषयमें) जो बात कही है, उसे तुम मुझसे सुनो। वह कहता था, 'मृगोंके राजा बाघके बलको धिक्कार है! आज इस मृगको तो मैंने मारा है ॥ ३६ ॥

मद्बाहुबलमाश्रित्य तृप्तिमद्य गमिष्यति । गर्जमानस्य तस्यैवमतो भक्ष्यं न रोचये ॥ ३७ ॥ ‘मेरे बाहुबलका आश्रय लेकर आज वह अपनी भूख बुझायेगा।' उसने इस प्रकार गरज-गरजकर (घमंडभरी) बातें कही हैं, अतः उसकी सहायतासे प्राप्त हुए इस भोजनको ग्रहण करना मुझे अच्छा नहीं लगता ॥ ३७ ॥

व्याघ्र उवाच

ब्रवीति यदि स ह्येवं काले ह्यस्मिन् प्रबोधितः । स्वबाहुबलमाश्रित्य हनिष्येऽहं वनेचरान् ॥ ३८ ॥ खादिष्ये तत्र मांसानि इत्युक्त्वा प्रस्थितो वनम् । एतस्मिन्नेव काले तु मूषिकोऽप्याजगाम ह ॥ ३९ ॥ तमागतमभिप्रेत्य शृगालोऽप्यब्रवीद् वचः । बाघने कहा— यदि वह ऐसी बात कहता है, तब तो उसने इस समय मेरी आँखें खोल दीं—मुझे सचेत कर दिया। आजसे मैं अपने ही बाहुबलके भरोसे वन-जन्तुओंका वध किया करूँगा और उन्हींका मांस खाऊँगा। यों कहकर बाघ वनमें चला गया। इसी समय चूहा भी (नहा-धोकर) वहाँ आ पहुँचा। उसे आया देख गीदड़ने कहा ॥ ३८-३९ १/२ ॥

जम्बुक उवाच

शृणु मूषिक भद्रं ते नकुलो यदिहाब्रवीत् ॥ ४० ॥ गीदड़ बोला— चूहा भाई! तुम्हारा भला हो। नेवलेने यहाँ जो बात कही है, उसे सुन लो ॥ ४० ॥

मृगमांसं न खादेयं गरमेतन्न रोचते । मूषिकं भक्षयिष्यामि तद् भवाननुमन्यताम् ॥ ४१ ॥ वह कह रहा था कि 'बाघके काटनेसे इस हरिणका मांस जहरीला हो गया है, मैं तो इसे खाऊँगा नहीं; क्योंकि यह मुझे पसंद नहीं है। यदि तुम्हारी अनुमति हो तो मैं चूहेको ही खा लूँ' ॥ ४१ ॥

तच्छ्रुत्वा मूषिको वाक्यं संत्रस्तः प्रगतो बिलम् ।

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