भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1050, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1050

'उस समय लोग यही समझेंगे कि अपने ही घरमें आग लगी थी, उसीमें पाण्डव जल गये। अतः वे पाण्डवोंकी मृत्युके लिये कभी हमारी निन्दा नहीं करेंगे' ।। १७ ।। स तथेति प्रतिज्ञाय कौरवाय पुरोचनः । प्रायाद् रासभयुक्तेन स्यन्दनेनाशुगामिना ।। १८ ।। पुरोचनने दुर्योधनके सामने वैसा ही करनेकी प्रतिज्ञा की एवं खच्चर जुते हुए शीघ्रगामी रथपर आरूढ़ हो वहाँसे वारणावत नगरके लिये प्रस्थान किया ।। १८ ।। स गत्वा त्वरितं राजन् दुर्योधनमते स्थितः । यथोक्तं राजपुत्रेण सर्वं चक्रे पुरोचनः ।। १९ ।। राजन्! पुरोचन दुर्योधनकी रायके अनुसार चलता था। वारणावतमें शीघ्र ही पहुँचकर उसने राजकुमार दुर्योधनके कथनानुसार सब काम पूरा कर लिया ।। १९ ।।

इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि जतुगृहपर्वणि पुरोचनोपदेशे त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः ।। १४३ ।। इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जतुगृहपर्वमें पुरोचनके प्रति दुर्योधनकृत उपदेशविषयक एक सौ तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। १४३ ।।