महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(प्राक् संध्यातो विमोक्तव्यो रक्षितव्यश्च नित्यशः । एवं रमस्व भीमेन यावद् गर्भस्य वेदनम् ।। एष ते समयो भद्रे शुश्रूष्यश्चाप्रमत्तया । नित्यानुकूलया भूत्वा कर्तव्यं शोभनं त्वया ।।
संध्याकाल आनेसे पहले ही इन्हें छोड़ देना होगा और नित्य-निरन्तर इनकी रक्षा करनी होगी। इस शर्तपर तुम भीमसेनके साथ सुखपूर्वक तबतक रहो, जबतक कि तुम्हें यह पता न चल जाय कि तुम्हारे गर्भमें बालक आ गया है। भद्रे! यही तुम्हारे लिये पालन करनेयोग्य नियम है। तुम्हें सावधान होकर भीमसेनकी सेवा करनी चाहिये और नित्य उनके अनुकूल होकर सदा उनकी भलाईमें संलग्न रहना चाहिये।
युधिष्ठिरेणैवमुक्ता कुन्त्या चाङ्केऽधिरोपिता । भीमार्जुनान्तरगता यमाभ्यां च पुरस्कृता ।। तिर्यग् युधिष्ठिरे याति हिडिम्बा भीमगामिनी । शालिहोत्रसरो रम्यमासेदुस्ते जलार्थिनः ।। तत् तथेति प्रतिज्ञाय हिडिम्बा राक्षसी तदा । वनस्पतितलं गत्वा परिमृज्य गृहं यथा ।। पाण्डवानां च वासं सा कृत्वा पर्णमयं तथा ।