भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 115, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 115

यत्र यौधिष्ठिरं सैन्यं विषादमगमत् परम् ॥ २४५ ॥ यत्र युद्धमभूद् घोरं दशाहानि सुदारुणम् । कश्मलं यत्र पार्थस्य वासुदेवो महामतिः ॥ २४६ ॥ मोहजं नाशयामास हेतुभिर्मोक्षदर्शिभिः । समीक्ष्याधोक्षजः क्षिप्रं युधिष्ठिरहिते रतः ॥ २४७ ॥ रथादाप्लुत्य वेगेन स्वयं कृष्ण उदारधीः । प्रतोदपाणिराधावद् भीष्मं हन्तु व्यपेतभीः ॥ २४८ ॥ इसके बाद विचित्र अर्थोंसे भरे भीष्मपर्वकी विषय-सूची कही जाती है, जिसमें संजयने जम्बूद्वीपकी रचनासम्बन्धी कथा कही है। इस पर्वमें दस दिनोंतक अत्यन्त भयंकर घोर युद्ध होनेका वर्णन आता है, जिसमें धर्मराज युधिष्ठिरकी सेनाके अत्यन्त दुःखी होनेकी कथा है। इसी युद्धके प्रारम्भमें महातेजस्वी भगवान् वासुदेवने मोक्षतत्त्वका ज्ञान करानेवाली युक्तियोंद्वारा अर्जुनके मोहजनित शोक-संतापका नाश किया था (जो कि भगवद्गीताके नामसे प्रसिद्ध है)। इसी पर्वमें यह कथा भी है कि युधिष्ठिरके हितमें संलग्न रहनेवाले निर्भय, उदारबुद्धि, अधोक्षज, भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुनकी शिथिलता देख शीघ्र ही हाथमें चाबुक लेकर भीष्मको मारनेके लिये स्वयं रथसे कूद पड़े और बड़े वेगसे दौड़े ॥ २४४—२४८ ॥

वाक्यप्रतोदाभिहतो यत्र कृष्णेन पाण्डवः । गाण्डीवधन्वा समरे सर्वशस्त्रभृतां वरः ॥ २४९ ॥ साथ ही सब शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ गाण्डीवधन्वा अर्जुनको युद्धभूमिमें भगवान् श्रीकृष्णने व्यंग्य-वाक्यके चाबुकसे मार्मिक चोट पहुँचायी ॥ २४९ ॥

शिखण्डिनं पुरस्कृत्य यत्र पार्थो महाधनुः । विनिघ्नन् निशितैर्बाणै रथाद् भीष्ममपातयत् ॥ २५० ॥ तब महाधनुर्धर अर्जुनने शिखण्डीको सामने करके तीखे बाणोंसे घायल करते हुए भीष्मपितामहको रथसे गिरा दिया ॥ २५० ॥

शरतल्पगतश्चैव भीष्मो यत्र बभूव ह । षष्ठमेतत् समाख्यातं भारते पर्व विस्तृतम् ॥ २५१ ॥ जबकि भीष्मपितामह शरशय्यापर शयन करने लगे। महाभारतमें यह छठा पर्व विस्तारपूर्वक कहा गया है ॥ २५१ ॥

अध्यायानां शतं प्रोक्तं तथा सप्तदशापरे । पञ्च श्लोकसहस्राणि संख्ययाष्टौ शतानि च ॥ २५२ ॥ श्लोकाश्च चतुराशीतिरस्मिन् पर्वणि कीर्तिताः । व्यासेन वेदविदुषा संख्याता भीष्मपर्वणि ॥ २५३ ॥

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व · पृष्ठ 115, कुल 2256 में से · BharatKosha