भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 1157

विषयमें साधु पुरुषोंका ऐसा ही मत है ॥ १८ ॥ एवमुक्तस्तु पृथया स विप्रो भार्यया सह । हृष्टः सम्पूजयामास तद्वाक्यममृतोपमम् ॥ १९ ॥ कुन्तीदेवीके यों कहनेपर पत्नीसहित वह ब्राह्मण बहुत प्रसन्न हुआ और उसने कुन्तीके अमृत-तुल्य जीवनदायक मधुर वचनोंकी बड़ी प्रशंसा की ॥ १९ ॥ ततः कुन्ती च विप्रश्च सहितावनिलात्मजम् । तमब्रूतां कुरुष्वेति स तथेत्यब्रवीच्च तौ ॥ २० ॥ तदनन्तर कुन्ती और ब्राह्मणने मिलकर वायु-नन्दन भीमसेनसे कहा—'तुम यह काम कर दो।' भीमसेनने उन दोनोंसे 'तथास्तु' कहा ॥ २० ॥

इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि बकवधपर्वणि भीमबकवधाङ्गीकारे षष्ट्यधिकशततमोऽध्यायः ॥ १६० ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत बकवधपर्वमें भीमके द्वारा बकवधकी स्वीकृतिविषयक एक सौ साठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १६० ॥