भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 1168

तदनन्तर भीमसेनने उस राक्षसकी लाश उठाकर नगरके दरवाजेपर गिरा दी और स्वयं दूसरोंकी दृष्टिसे अपनेको बचाते हुए चले गये ॥ ७ ॥ दृष्ट्वा भीमबलोद्धूतं बकं विनिहतं तदा । ज्ञातयोऽस्य भयोद्विग्नाः प्रतिजग्मुस्ततस्ततः ॥ ८ ॥ भीमसेनके बलसे बकासुरको पछाड़ा एवं मारा गया देख उस राक्षसके कुटुम्बीजन भयसे व्याकुल हो इधर-उधर भाग गये ॥ ८ ॥ ततः स भीमस्तं हत्वा गत्वा ब्राह्मणवेश्म तत् । आचचक्षे यथावृत्तं राज्ञः सर्वमशेषतः ॥ ९ ॥ उस राक्षसको मारनेके पश्चात् भीमसेन ब्राह्मणके उसी घरमें गये तथा वहाँ उन्होंने राजा युधिष्ठिरसे सारा वृत्तान्त ठीक-ठीक कह सुनाया ॥ ९ ॥ ततो नरा विनिष्क्रान्ता नगरात् कल्पमेव तु । ददृशुर्निहतं भूमौ राक्षसं रुधिरोक्षितम् ॥ १० ॥ तत्पश्चात् जब सबेरा हुआ और लोग नगरसे बाहर निकले, तब उन्होंने देखा बकासुर खूनसे लथपथ हो पृथ्वीपर मरा पड़ा है ॥ १० ॥ तमद्रिकूटसदृशं विनिकीर्णं भयानकम् । दृष्ट्वा संहृष्टरोमाणो बभूवुस्तत्र नागराः ॥ ११ ॥ पर्वतशिखरके समान भयानक उस राक्षसको नगरके दरवाजेपर फेंका हुआ देखकर नगरनिवासी मनुष्योंके शरीरमें रोमांच हो आया ॥ ११ ॥ एकचक्रां ततो गत्वा प्रवृत्तिं प्रददुः पुरे । ततः सहस्रशो राजन् नरा नगरवासिनः ॥ १२ ॥ तत्राजग्मुर्बकं द्रष्टुं सस्त्रीवृद्धकुमारकाः । ततस्ते विस्मिताः सर्वे कर्म दृष्ट्वातिमानुषम् । दैवतान्यर्चयांचक्रुः सर्व एव विशाम्पते ॥ १३ ॥ राजन्! उन्होंने एकचक्रा नगरीमें जाकर नगरभरमें यह समाचार फैला दिया; फिर तो हजारों नगरनिवासी मनुष्य स्त्री, बच्चों और बूढ़ोंके साथ बकासुरको देखनेके लिये वहाँ आये। उस समय वह अमानुषिक कर्म देखकर सबको बड़ा आश्चर्य हुआ। जनमेजय! उन सभी लोगोंने देवताओंकी पूजा की ॥ १२-१३ ॥ ततः प्रगणयामासुः कस्य वारोऽद्य भोजने । ज्ञात्वा चागम्य तं विप्रं पप्रच्छुः सर्व एव ते ॥ १४ ॥ इसके बाद उन्होंने यह जाननेके लिये कि आज भोजन पहुँचानेकी किसकी बारी थी, दिन आदिकी गणना की। फिर उस ब्राह्मणकी बारीका पता लगनेपर सब लोग उसके पास आकर पूछने लगे ॥ १४ ॥ एवं पृष्टः स बहुशो रक्षमाणश्च पाण्डवान् ।