भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1240, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1240

एवमुक्तस्तथा पार्थ विश्वामित्रो बलादिव ॥ २१ ॥ हंसचन्द्रप्रतीकाशां नन्दिनीं तां जहार गाम् । कशादण्डप्रणुदितां काल्यमानामितस्ततः ॥ २२ ॥ **गन्धर्व कहता है—**अर्जुन! वसिष्ठजीके यों कहनेपर विश्वामित्रने मानो बलपूर्वक ही हंस और चन्द्रमाके समान श्वेत रंगवाली उस नन्दिनी गायका अपहरण कर लिया। उसे कोड़ों और डंडोंसे मार-मारकर इधर-उधर हाँका जा रहा था ॥ २१-२२ ॥ हम्भायमाना कल्याणी वसिष्ठस्याथ नन्दिनी । आगम्याभिमुखी पार्थ तस्थौ भगवदुन्मुखी ॥ २३ ॥ भृशं च ताड्यमाना वै न जगामाश्रमात् ततः । अर्जुन! उस समय कल्याणमयी नन्दिनी डकराती हुई महर्षि वसिष्ठके सामने आकर खड़ी हो गयी और उन्हींकी ओर मुँह करके देखने लगी। उसके ऊपर जोर-जोरसे मार पड़ रही थी, तो भी वह आश्रमसे अन्यत्र नहीं गयी ॥ २३ ½ ॥

वसिष्ठ उवाच

शृणोमि ते रवं भद्रे विनदन्त्याः पुनः पुनः ॥ २४ ॥ ह्रियसे त्वं बलाद् भद्रे विश्वामित्रेण नन्दिनि । किं कर्तव्यं मया तत्र क्षमावान् ब्राह्मणो ह्यहम् ॥ २५ ॥ **वसिष्ठजी बोले—**भद्रे! तुम बार-बार क्रन्दन कर रही हो। मैं तुम्हारा आर्तनाद सुनता हूँ, परंतु क्या करूँ? कल्याणमयी नन्दिनि! विश्वामित्र तुम्हें बलपूर्वक हर ले जा रहे हैं। इसमें मैं क्या कर सकता हूँ। मैं एक क्षमाशील ब्राह्मण हूँ ॥ २४-२५ ॥

गन्धर्व उवाच

सा भयान्नन्दिनी तेषां बलानां भरतर्षभ । विश्वामित्रभयोद्विग्ना वसिष्ठं समुपागमत् ॥ २६ ॥ **गन्धर्व कहता है—**भरतवंशशिरोमणे! नन्दिनी विश्वामित्रके भयसे उद्विग्न हो उठी थी। वह उनके सैनिकोंके भयसे मुनिवर वसिष्ठकी शरणमें गयी ॥ २६ ॥

गौरुवाच

कशाग्रदण्डाभिहतां क्रोशन्तीं मामनाथवत् । विश्वामित्रबलैर्घोरैर्भगवन् किमुपेक्षसे ॥ २७ ॥ **गौने कहा—**भगवन्! विश्वामित्रके निर्दय सैनिक मुझे कोड़ों और डंडोंसे पीट रहे हैं। मैं अनाथकी भाँति क्रन्दन कर रही हूँ। आप क्यों मेरी उपेक्षा कर रहे हैं? ॥ २७ ॥

गन्धर्व उवाच

नन्दिन्यामेवं क्रन्दन्त्यां धर्षितायां महामुनिः ।