महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1308, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंदमघोषसुतो धीरः शिशुपालो महामतिः ।
धनुरादायमानस्तु जानुभ्यामगमन्महीम् ॥ २५ ॥
इस प्रकार जब वे सभी क्षत्रिय सब ओरसे हट गये, तब यमराजके समान बलवान्,
धीर, वीर, चेदिराज दमघोषपुत्र महाबुद्धिमान् शिशुपाल धनुष उठानेके लिये चला। परंतु
उसपर हाथ लगाते ही घुटनोंके बल पृथ्वीपर गिर पड़ा ॥ २४-२५ ॥
ततो राजा महावीर्यो जरासंधो महाबलः ।
धनुषोऽभ्याशमागत्य तस्थौ गिरिरिवाचलः ॥ २६ ॥
तदनन्तर महापराक्रमी एवं महाबली राजा जरासंध धनुषके निकट आकर पर्वतकी
भाँति अविचलभावसे खड़ा हो गया ॥ २६ ॥
धनुषा पीड्यमानस्तु जानुभ्यामगमन्महीम् ।
तत उत्थाय राजा स स्वराष्ट्राण्यभिजग्मिवान् ॥ २७ ॥
परंतु उठाते समय धनुषका झटका खाकर वह भी घुटनेके बल गिर पड़ा। तब वहाँसे
उठकर राजा जरासंध अपने राज्यको चला गया ॥ २७ ॥
ततः शल्यो महावीरो मद्रराजो महाबलः ।
तदप्यारोप्यमाणस्तु जानुभ्यामगमन्महीम् ॥ २८ ॥
तत्पश्चात् महावीर एवं महाबली मद्रराज शल्य आये। पर उन्होंने भी उस धनुषको
चढ़ाते समय धरतीपर घुटने टेक दिये ॥ २८ ॥
(ततो दुर्योधनो राजा धार्तराष्ट्रः परंतपः ।
मानी दृढास्त्रसम्पन्नः सर्वैश्च नृपलक्षणैः ॥
उत्थितः सहसा तत्र भ्रातृमध्ये महाबलः ।
विलोक्य द्रौपदीं हृष्टो धनुषोऽभ्याशमागमत् ॥
स बभौ धनुरादाय शक्रश्चापधरो यथा ।
आरोपयंस्तु तद् राजा धनुषा बलिना तदा ॥
उत्तानशय्यमपतदङ्गुल्यन्तरताडितः ।
स ययौ ताडितस्तेन व्रीडन्निव नराधिपः ॥)
तदनन्तर शत्रुओंको संताप देनेवाला धृतराष्ट्रपुत्र महाबली राजा दुर्योधन सहसा अपने
भाइयोंके बीचसे उठकर खड़ा हो गया। उसके अस्त्र-शस्त्र बड़े मजबूत थे। वह स्वाभिमानी
होनेके साथ ही समस्त राजोचित लक्षणोंसे सम्पन्न था। द्रौपदीको देखकर उसका हृदय
हर्षसे खिल उठा और वह शीघ्रतापूर्वक धनुषके पास आया। उस धनुषको हाथमें लेकर वह
चापधारी इन्द्रके समान शोभा पाने लगा। राजा दुर्योधन उस मजबूत धनुषपर जब प्रत्यंचा
चढ़ाने लगा, उस समय उसके अँगुलियोंके बीचमें झटकेसे ऐसी चोट लगी कि वह चित्त
लोट गया। धनुषकी चोट खाकर राजा दुर्योधन अत्यन्त लज्जित होता हुआ-सा अपने
स्थानपर लौट गया।