महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजिज्ञासयैवाथ कुरूत्तमानां द्रव्याण्यनेकान्युपसंजहार ॥ ४ ॥ भारत! उस समय धर्मराज युधिष्ठिरने जो बातें कही थीं, उन्हें पुरोहितके मुखसे सुनकर उन कुरुश्रेष्ठ वीरोंके शीलस्वभावकी परीक्षाके लिये राजा द्रुपदने अनेक प्रकारकी वस्तुओंका संग्रह किया ॥ ४ ॥
फलानि माल्यानि च संस्कृतानि वर्माणि चर्माणि तथाऽऽसनानि । गाश्चैव राजन्नथ चैव रज्जू- र्बीजानि चान्यानि कृषिनिमित्तम् ॥ ५ ॥ अन्येषु शिल्पेषु च यान्यपि स्युः सर्वाणि कृत्यान्यखिलेन तत्र । क्रीडानिमित्तान्यपि यानि तत्र सर्वाणि तत्रोपजहार राजा ॥ ६ ॥ राजन्! (सब प्रकारके) फल, सुन्दर ढंगसे बनायी हुई मालाएँ, कवच, ढाल, आसन, गौएँ रस्सियाँ, बीज एवं खेतीके अन्य सामान तथा अन्य कारीगरियोंके सब सामान पूर्णरूपसे वहाँ संगृहीत किये गये थे। इसके सिवा, खेलके लिये जो आवश्यक वस्तुएँ होती हैं, उन सबको राजा द्रुपदने वहाँ जुटाकर रखा था ॥ ५-६ ॥
वर्माणि चर्माणि च भानुमन्ती खड्गा महान्तोऽश्वरथाश्च चित्राः । धनूंषि चाग्र्याणि शराश्च चित्राः शक्त्यृष्टयः काञ्चनभूषणाश्च ॥ ७ ॥ प्रासा भुशुण्ड्यश्च परश्वधाश्च सांग्रामिकं चैव तथैव सर्वम् । शय्यासनान्युत्तमवस्तुवन्ति तथैव वासो विविधं च तत्र ॥ ८ ॥ दूसरी ओर कवच, चमकती हुई ढालें, तलवारें, बड़े-बड़े विचित्र घोड़े तथा रथ, श्रेष्ठ धनुष, विचित्र बाण, सुवर्ण-भूषित शक्तियाँ एवं ऋष्टियाँ, प्रास, भुशुण्डियाँ, फरसे तथा सब प्रकारकी युद्धसामग्री, उत्तम वस्तुओंसे युक्त शय्या-आसन और नाना प्रकारके वस्त्र भी वहाँ संग्रह करके रखे गये थे ॥ ७-८ ॥
कुन्ती तु कृष्णां परिगृह्य साध्वी- मन्तःपुरं द्रुपदस्याविवेश । स्त्रियश्च तां कौरवराजपत्नीं प्रत्यर्चयामासुरदीनसत्त्वाः ॥ ९ ॥