भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1708, कुल 2256 में से

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पृष्ठ 1708

इत्येषा मे मती राजन् यथा वा मन्यसेऽनघ । एवंगते ममाचक्ष्व स्वयं निश्चित्य हेतुभिः ॥ ७० ॥ निष्पाप नरेश! मेरा मत तो यही है, फिर आप जैसा उचित समझें, करें। ऐसी दशामें स्वयं हेतु और युक्तियोंद्वारा कुछ निश्चय करके मुझे बताइये ॥ ७० ॥

इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि राजसूयारम्भपर्वणि कृष्णवाक्ये चतुर्दशोऽध्यायः ॥ १४ ॥

इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत राजसूयारम्भपर्वमें श्रीकृष्णवाक्य-विषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १४ ॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/३ श्लोक मिलाकर कुल ७५ १/३ श्लोक हैं)

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