भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 1940

कन्यका ऊचुः

नारदेन समाख्यातमस्माकं पुरुषोत्तम । आगमिष्यति गोविन्दः सुरकार्यार्थसिद्धये ॥ कन्याएँ बोलीं— पुरुषोत्तम! देवर्षि नारदने हमसे कह रखा था कि 'देवताओंका कार्य सिद्ध करनेके लिये भगवान् गोविन्द यहाँ पधारेंगे। सोऽसुरं नरकं हत्वा निशुम्भं मुरमेव च । भौमं च सपरीवारं हयग्रीवं च दानवम् ॥ तथा पञ्चजनं चैव प्राप्स्यते धनमक्षयम् । 'एवं वे सपरिवार नरकासुर, निशुम्भ, मुर, दानव हयग्रीव तथा पंचजनको मारकर अक्षय धन प्राप्त करेंगे। सोऽचिरेणैव कालेन युष्मन्मोक्ता भविष्यति ॥ एवमुक्त्वागमद् धीमान् देवर्षिर्नारदस्तथा । 'थोड़े ही दिनोंमें भगवान् यहाँ पधारकर तुम सब लोगोंका इस संकटसे उद्धार करेंगे।' ऐसा कहकर परम बुद्धिमान् देवर्षि नारद यहाँसे चले गये। त्वां चिन्तयानाः सततं तपो घोरमुपास्महे ।। कालेऽतीते महाबाहुं कदा द्रक्ष्याम माधवम् । हम सदा आपका ही चिन्तन करती हुई घोर तपस्यामें लग गयीं। हमारे मनमें यह संकल्प उठता रहता था कि कितना समय बीतनेपर हमें महाबाहु माधवका दर्शन प्राप्त होगा।