महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभरतश्रेष्ठ! बाणासुर भी क्रोधसे आगबबूला हो रहा था। उसने भी युद्धमें भगवान् केशवपर सभी तीखे-तीखे अस्त्र-शस्त्र चलाये।
पुनरुद्यम्य शस्त्राणां सहस्रं सर्वबाहुभिः ॥ मुमोच बाणः संक्रुद्धः कृष्णं प्रति रणाजिरे । फिर उसने उद्योगपूर्वक अपनी सभी भुजाओंसे उस समरांगणमें कुपित हो श्रीकृष्णपर सहस्रों शस्त्रोंका प्रहार किया।
ततः कृष्णस्तु सच्छिद्य तानि सर्वाणि भारत ।। कृत्वा मुहूर्तं बाणेन युद्धं राजन्नधोक्षजः । चक्रमुद्यम्य राजन् वै दिव्यं शस्त्रोत्तमं ततः ।। सहस्रबाहूंश्चिच्छेद बाणस्यामिततेजसः । भारत! परंतु श्रीकृष्णने वे सभी शस्त्र काट डाले। राजन्! तदनन्तर भगवान् अधोक्षजने दो घड़ीतक बाणासुरके साथ युद्ध करके अपना दिव्य उत्तम शस्त्र चक्र हाथमें उठाया और अमिततेजस्वी बाणासुरकी सहस्र भुजाओंको काट दिया।
ततो बाणो महाराज कृष्णेन भृशपीडितः ।। छिन्नबाहुः पपाताशु विशाख इव पादपः । महाराज! तब श्रीकृष्णद्वारा अत्यन्त पीड़ित होकर बाणासुर भुजाएँ कट जानेपर शाखाहीन वृक्षकी भाँति धरतीपर गिर पड़ा।
स पातयित्वा बालेयं बाणं कृष्णस्त्वरान्वितः ।।