भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 2014, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2014

महातेजस्वी सहदेव महाराज युधिष्ठिरकी आज्ञासे भोजनार्थियोंको सदा भोजन दिलाया करते थे।

सस्तरे कुशलाश्चापि सर्वकर्माणि याजकाः । दिवसे दिवसे चक्रुर्यथाशास्त्रार्थचक्षुषः ॥ शास्त्रोक्त अर्थपर दृष्टि रखनेवाले यज्ञकुशल याजक प्रतिदिन सब कार्योंको विधिवत् सम्पन्न करते थे।

ब्राह्मणा वेदशास्त्रज्ञाः कथाश्चक्रुश्च सर्वदा । रेमिरे च कथान्ते तु सर्वे तस्मिन् महाक्रतौ ॥ वेद-शास्त्रोंके ज्ञाता ब्राह्मण वहाँ सदा कथा-प्रवचन किया करते थे। उस महायज्ञमें सब लोग कथाके अन्तमें बड़े सुखका अनुभव करते थे।

देवैरन्यैश्च यक्षैश्च उरगैर्दिव्यमानुषैः । विद्याधरगणैः कीर्णः पाण्डवस्य महात्मनः ॥ स राजसूयः शुशुभे धर्मराजस्य धीमतः । देवता, असुर, यक्ष, नाग, दिव्य मानव तथा विद्याधरगणोंसे भरा हुआ बुद्धिमान् पाण्डुनन्दन महात्मा धर्मराजका वह राजसूययज्ञ बड़ी शोभा पाता था।

गन्धर्वगणसंकीर्णः शोभितोऽप्सरसां गणैः ॥ देवैर्मुनिगणैर्यक्षैर्देवलोक इवापरः । स किम्पुरुषगीतैश्च किन्नरैरुपशोभितः ॥ वह यज्ञमण्डप गन्धर्वों, अप्सरा-समूहों, देवताओं, मुनिगणों तथा यक्षोंसे सुशोभित हो दूसरे देवलोकके समान जान पड़ता था। किम्पुरुषोंके गीत तथा किन्नरगण उस स्थानकी शोभा बढ़ा रहे थे।

नारदश्च जगौ तत्र तुम्बुरुश्च महाद्युतिः । विश्वावसुश्चित्रसेनस्तथान्ये गीतकोविदाः । रमयन्ति स्म तान् सर्वान् यज्ञकर्मान्तरेष्वथ ॥ नारद, महातेजस्वी तुम्बुरु, विश्वावसु, चित्रसेन तथा दूसरे गीतकुशल गन्धर्व वहाँ गीत गाकर यज्ञकार्योंके बीच-बीचमें अवकाश मिलनेपर सब लोगोंका मनोरंजन करते थे।

इतिहासपुराणानि आख्यानानि च सर्वशः । ऊचुर्वै शब्दशास्त्रज्ञा नित्यं कर्मान्तरेष्वथ ॥ यज्ञसम्बन्धी कर्मोंके बीचमें अवसर मिलनेपर व्याकरणशास्त्रके ज्ञाता विद्वान् पुरुष इतिहास, पुराण तथा सब प्रकारके उपाख्यान सुनाया करते थे।

भेर्यश्च मुरजाश्चैव मड्डुका गोमुखाश्च ये । शृङ्गवंशाम्बुजाश्चैव श्रूयन्ते स्म सहस्रशः ॥