भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2194

खगमैर्वारयामास तदाश्चर्यमिवाभवत् ।। यह देख अर्जुनने आकाशगामी बाणसमूहोंद्वारा सब ओरसे बादलोंको रोक दिया। वह एक अद्भुत-सी घटना हुई।

वारितान् मेघसङ्घांश्च श्रुत्वा क्रुद्धः पुरंदरः । पाण्डरं गजमास्थाय सर्वदेवगणैर्वृतः ।। ययौ पार्थेन संयोद्धुं रक्षार्थं खाण्डवस्य च ।। मेघोंको रोका गया सुनकर इन्द्रदेव कुपित हो उठे। श्वेतवर्णवाले ऐरावत हाथीपर आरूढ हो वे समस्त देवताओंके साथ खाण्डववनकी रक्षाके निमित्त अर्जुनसे युद्ध करनेके लिये गये।

रुद्राश्च मरुतश्चैव वसवश्चाश्विनौ तदा । आदित्याश्चैव साध्याश्च विश्वेदेवाश्च भारत ।। गन्धर्वाश्चैव सहिता अन्ये सुरगणाश्च ये । ते सर्वे शस्त्रसम्पन्ना दीप्यमानाः स्वतेजसा । धनंजयं जिघांसन्तः प्रपेतुर्विबुधाधिपाः ।। भारत! उस समय रुद्र, मरुद्गण, वसु, अश्विनीकुमार, आदित्य, साध्यगण, विश्वेदेव, गन्धर्व तथा अन्य देवगण अपने-अपने तेजसे देदीप्यमान एवं अस्त्र-शस्त्रोंसे सम्पन्न हो युद्धके लिये गये। वे सभी देवेश्वर अर्जुनको मार डालनेकी इच्छासे उनपर टूट पड़े।

ततो देवगणाः सर्वे युद्ध्वा पार्थेन वै मुहुः ।