महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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भगवानिव देवेशः शूलपाणिर्हिरण्मयः ।
विवर्धमानः सर्वांस्तान् पन्नगानभ्यहर्षयत् ॥ २२ ॥
अमित बुद्धिमान् आस्तीक बाल्यावस्थामें ही वहाँ रहकर ब्रह्मचर्यका पालन एवं धर्मका आचरण करने लगा। नागराजके भवनमें उसका भलीभाँति यत्नपूर्वक लालन-पालन किया गया। सुवर्णके समान कान्तिमान् शूलपाणि देवेश्वर भगवान् शिवकी भाँति वह बालक दिनोदिन बढ़ता हुआ समस्त नागोंका आनन्द बढ़ाने लगा ॥ २१-२२ ॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि आस्तीकोत्पत्तौ
अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः ॥ ४८ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें आस्तीककी उत्पत्तिविषयक अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ४८ ॥