भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 425, कुल 2256 में से

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पृष्ठ 425

सत्यवत्यात्मजेनेह व्याख्यातममितौजसा ॥ १४ ॥ असीम प्रभावशाली सत्यवतीनन्दन व्यासजीने पुण्यात्मा पाण्डवोंकी यह कथा एक लाख श्लोकोंमें कही है ॥ १४ ॥

य इदं श्रावयेद् विद्वान् ये चेदं शृणुयुर्नराः । ते ब्रह्मणः स्थानमेत्य प्राप्नुयुर्देवतुल्यताम् ॥ १५ ॥ जो विद्वान् इस आख्यानको सुनाता है और जो मनुष्य सुनते हैं, वे ब्रह्मलोकमें जाकर देवताओंके समान हो जाते हैं ॥ १५ ॥

इदं हि वेदैः समितं पवित्रमपि चोत्तमम् । श्राव्याणामुत्तमं चेदं पुराणमृषिसंस्तुतम् ॥ १६ ॥ यह ऋषियोंद्वारा प्रशंसित पुरातन इतिहास श्रवण करनेयोग्य सब ग्रन्थोंमें श्रेष्ठ है। यह वेदोंके समान ही पवित्र तथा उत्तम है ॥ १६ ॥

अस्मिन्नर्थश्च धर्मश्च निखिलेनोपदिश्यते । इतिहासे महापुण्ये बुद्धिश्च परिनैष्ठिकी ॥ १७ ॥ अक्षुद्रान् दानशीलांश्च सत्यशीलाननास्तिकान् । कार्ष्णं वेदमिमं विद्वाञ्श्रावयित्वार्थमश्नुते ॥ १८ ॥ इसमें अर्थ और धर्मका भी पूर्णरूपसे उपदेश किया जाता है। इस परम पावन इतिहाससे मोक्षबुद्धि प्राप्त होती है। जिनका स्वभाव अथवा विचार खोटा नहीं है, जो दानशील, सत्यवादी और आस्तिक हैं, ऐसे लोगोंको व्यासद्वारा विरचित वेदस्वरूप इस महाभारतका जो श्रवण कराता है, वह विद्वान् अभीष्ट अर्थको प्राप्त कर लेता है ॥ १७-१८ ॥

भ्रूणहत्याकृतं चापि पापं जह्यादसंशयम् । इतिहासमिमं श्रुत्वा पुरुषोऽपि सुदारुणः ॥ १९ ॥ मुच्यते सर्वपापेभ्यो राहुणा चन्द्रमा यथा । जयो नामेतिहासोऽयं श्रोतव्यो विजिगीषुणा ॥ २० ॥ साथ ही वह भ्रूणहत्या-जैसे पापको भी नष्ट कर देता है, इसमें संशय नहीं है। इस इतिहासको श्रवण करके अत्यन्त क्रूर मनुष्य भी राहुसे छूटे हुए चन्द्रमाकी भाँति सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। यह ‘जय’ नामक इतिहास विजयकी इच्छावाले पुरुषको अवश्य सुनना चाहिये ॥ १९-२० ॥

महीं विजयते राजा शत्रूंश्चापि पराजयेत् । इदं पुंसवनं श्रेष्ठमिदं स्वस्त्ययनं महत् ॥ २१ ॥ इसका श्रवण करनेवाला राजा भूमिपर विजय पाता और सब शत्रुओंको परास्त कर देता है। यह पुत्रकी प्राप्ति करानेवाला और महान् मंगलकारी श्रेष्ठ साधन है ॥ २१ ॥

महिषीयुवराजाभ्यां श्रोतव्यं बहुशस्तथा ।

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