महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 468, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंअब मैं धर्मकी पत्नियोंके नाम बता रहा हूँ, सुनो—कीर्ति, लक्ष्मी, धृति, मेधा, पुष्टि, श्रद्धा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा और मति—ये धर्मकी दस पत्नियाँ हैं। स्वयम्भू ब्रह्माजीने इन सबको धर्मका द्वार निश्चित किया है अर्थात् इनके द्वारा धर्ममें प्रवेश होता है ॥ १४-१५ ॥
सप्तविंशतिः सोमस्य पत्न्यो लोकस्य विश्रुताः । कालस्य नयने युक्ताः सोमपत्न्यः शुचिव्रताः ॥ १६ ॥ चन्द्रमाकी सत्ताईस स्त्रियाँ समस्त लोकोंमें विख्यात हैं। वे पवित्र व्रत धारण करनेवाली सोमपत्नियॉं काल-विभागका ज्ञापन करनेमें नियुक्त हैं ॥ १६ ॥
सर्वा नक्षत्रयोगिन्यो लोकयात्राविधानतः । पैतामहो मुनिर्देवस्तस्य पुत्रः प्रजापतिः । तस्याष्टौ वसवः पुत्रास्तेषां वक्ष्यामि विस्तरम् ॥ १७ ॥ धरो ध्रुवश्च सोमश्च अहश्चैवानिलोऽनलः । प्रत्यूषश्च प्रभासश्च वसवोऽष्टौ प्रकीर्तिताः ॥ १८ ॥ लोक-व्यवहारका निर्वाह करनेके लिये वे सब-की-सब नक्षत्र-वाचक नामोंसे युक्त हैं। पितामह ब्रह्माजीके स्तनसे उत्पन्न होनेके कारण मुनिवर धर्मदेव उनके पुत्र माने गये हैं। प्रजापति दक्ष भी ब्रह्माजीके ही पुत्र हैं। दक्षकी कन्याओंके गर्भसे धर्मके आठ पुत्र उत्पन्न हुए, जिन्हें वसुगण कहते हैं। अब मैं वसुओंका विस्तारपूर्वक परिचय देता हूँ। धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभास—ये आठ वसु कहे गये हैं ॥ १७-१८ ॥
धूम्नायास्तु धरः पुत्रो ब्रह्मविद्यो ध्रुवस्तथा । चन्द्रमास्तु मनस्विन्याः श्वासायाः श्वसनस्तथा ॥ १९ ॥ रतायाश्चाप्यहः पुत्रः शाण्डिल्याश्च हुताशनः । प्रत्यूषश्च प्रभासश्च प्रभातायाः सुतौ स्मृतौ ॥ २० ॥ धर और ब्रह्मवेत्ता ध्रुव धूम्राके पुत्र हैं। चन्द्रमा मनस्विनीके और अनिल श्वासाके पुत्र हैं। अह रताके और अनल शाण्डिलीके पुत्र हैं तथा प्रत्यूष और प्रभास ये दोनों प्रभाताके पुत्र बताये गये हैं ॥ १९-२० ॥
धरस्य पुत्रो द्रविणो हुतहव्यवहस्तथा । ध्रुवस्य पुत्रो भगवान् कालो लोकप्रकालनः ॥ २१ ॥ धरके दो पुत्र हुए—द्रविण तथा हुतहव्यवह। सब लोकोंको अपना ग्रास बनानेवाले भगवान् काल ध्रुवके पुत्र हैं ॥ २१ ॥
सोमस्य तु सुतो वर्चा वर्चस्वी येन जायते । मनोहरायाः शिशिरः प्राणोऽथ रमणस्तथा ॥ २२ ॥