भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 474

कल्याणगुणसम्पन्ना सर्वलक्षणपूजिता ॥ ५९ ॥ कल्याणमयी धृतराष्ट्रीने सब प्रकारके हंसों, कल-हंसों तथा चक्रवाकोंको जन्म दिया। कल्याणमय गुणोंसे सम्पन्न तथा समस्त शुभ लक्षणोंसे युक्त यशस्विनी शुकीने शुकों (तोतों)-को ही उत्पन्न किया ॥ ५८-५९ ॥ नव क्रोधवशा नारीः प्रजज्ञे क्रोधसम्भवाः । मृगी च मृगमन्दा च हरी भद्रमना अपि ॥ ६० ॥ मातङ्गी त्वथ शार्दूली श्वेता सुरभिरेव च । सर्वलक्षणसम्पन्ना सुरसा चैव भामिनी ॥ ६१ ॥ क्रोधवशाने नौ प्रकारकी क्रोधजनित कन्याओंको जन्म दिया। उनके नाम ये हैं—मृगी, मृगमन्दा, हरी, भद्रमना, मातंगी, शार्दूली, श्वेता, सुरभि तथा सम्पूर्ण शुभ लक्षणोंसे सम्पन्न सुन्दरी सुरसा ॥ ६०-६१ ॥ अपत्यं तु मृगाः सर्वे मृग्या नरवरोत्तम । ऋक्षांश्च मृगमन्दायाः सृमरांश्च परंतप ॥ ६२ ॥ ततस्त्वैरावतं नागं जज्ञे भद्रमनाः सुतम् । ऐरावतः सुतस्तस्या देवनागो महागजः ॥ ६३ ॥ नरश्रेष्ठ! समस्त मृग मृगीकी संतानें हैं। परंतप! मृगमन्दासे रीछ तथा सृमर (छोटी जातिके मृग) उत्पन्न हुए। भद्रमनाने ऐरावत हाथीको अपने पुत्ररूपमें उत्पन्न किया। देवताओंका हाथी महान् गजराज ऐरावत भद्रमनाका ही पुत्र है ॥ ६२-६३ ॥ हर्याश्च हरयोऽपत्यं वानराश्च तरस्विनः । गोलांगूलांश्च भद्रं ते हर्याः पुत्रान् प्रचक्षते ॥ ६४ ॥ प्रजज्ञे त्वथ शार्दूली सिंहान् व्याघ्राननेकशः । द्वीपिनश्च महासत्त्वान् सर्वानैव न संशयः ॥ ६५ ॥ राजन्! तुम्हारा कल्याण हो, वेगवान् घोड़े और वानर हरीके पुत्र हैं। गायके समान पूँछवाले लंगूरोंको भी हरीका ही पुत्र बताया जाता है। शार्दूलीने सिंहों, अनेक प्रकारके बाघों और महान् बलशाली सभी प्रकारके चीतोंको भी जन्म दिया, इसमें संशय नहीं है ॥ ६४-६५ ॥ मातङ्ग्यपि च मातङ्गानपत्यानि नराधिप । दिशां गजं तु श्वेताख्यं श्वेताजनयदाशुगम् ॥ ६६ ॥ तथा दुहितरौ राजन् सुरभिर्वै व्यजायत । रोहिणी चैव भद्रं ते गन्धर्वी तु यशस्विनी ॥ ६७ ॥ नरेश्वर! मातंगीने मतवाले हाथियोंको संतानके रूपमें उत्पन्न किया। श्वेताने शीघ्रगामी दिग्गज श्वेतको जन्म दिया। राजन्! तुम्हारा भला हो, सुरभिने दो