भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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(आस्तीकपर्व)

**१३-** जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना **१४-** जरत्कारुद्वारा वासुकिकी बहिनका पाणिग्रहण **१५-** आस्तीकका जन्म तथा मातृशापसे सर्पसत्रमें नष्ट होनेवाले नागवंशकी उनके द्वारा रक्षा **१६-** कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति **१७-** मेरुपर्वतपर अमृतके लिये विचार करनेवाले देवताओंको भगवान् नारायणका समुद्र-मन्थनके लिये आदेश **१८-** देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्‌का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना **१९-** देवताओंका अमृतपान, देवासुरसंग्राम तथा देवताओंकी विजय **२०-** कद्रू और विनताकी होड़, कद्रूद्वारा अपने पुत्रोंको शाप एवं ब्रह्माजीद्वारा उसका अनुमोदन **२१-** समुद्रका विस्तारसे वर्णन **२२-** नागोंद्वारा उच्चैःश्रवाकी पूँछको काली बनाना; कद्रू और विनताका समुद्रको देखते हुए आगे बढ़ना **२३-** पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुड़की उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति **२४-** गरुड़के द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना **२५-** सूर्यके तापसे मूर्च्छित हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति **२६-** इन्द्रद्वारा की हुई वर्षासे सर्पोंकी प्रसन्नता **२७-** रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुड़का दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना **२८-** गरुड़का अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना **२९-** कश्यपजीका गरुड़को हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुड़का उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना **३०-** गरुड़का कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुड़का निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना