महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवारणावतयात्रायां मन्त्रो दुर्योधनस्य च । कूटस्य धार्तराष्ट्रेण प्रेषणं पाण्डवान् प्रति ॥ १०२ ॥ हितोपदेशश्च पथि धर्मराजस्य धीमतः । विदुरेण कृतो यत्र हितार्थं म्लेच्छभाषया ॥ १०३ ॥ लाक्षागृहदाहपर्वमें पाण्डवोंकी वारणावत-यात्राके प्रसंगमें दुर्योधनके गुप्त षड्यन्त्रका वर्णन है। उसका पाण्डवोंके पास कूटनीतिज्ञ पुरोचनको भेजनेका भी प्रसंग है। मार्गमें विदुरजीने बुद्धिमान् युधिष्ठिरके हितके लिये म्लेच्छभाषामें जो हितोपदेश किया, उसका भी वर्णन है ॥ १०२-१०३ ॥
विदुरस्य च वाक्येन सुरङ्गोपक्रमक्रिया । निषाद्याः पञ्चपुत्रायाः सुप्ताया जतुवेश्मनि ॥ १०४ ॥ पुरोचनस्य चात्रैव दहनं सम्प्रकीर्तितम् । पाण्डवानां वने घोरे हिडिम्बायाश्च दर्शनम् ॥ १०५ ॥ तत्रैव च हिडिम्बस्य वधो भीमन्महाबलात् । घटोत्कचस्य चोत्पत्तिरत्रैव परिकीर्तिता ॥ १०६ ॥ फिर विदुरकी बात मानकर सुरंग खुदवानेका कार्य आरम्भ किया गया। उसी लाक्षागृहमें अपने पाँच पुत्रोंके साथ सोती हुई एक भीलनी और पुरोचन भी जल मरे—यह सब कथा कही गयी है। हिडिम्बवधपर्वमें घोर वनके मार्गसे यात्रा करते समय पाण्डवोंको हिडिम्बाके दर्शन, महाबली भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरके वध तथा घटोत्कचके जन्मकी कथा कही गयी है ॥ १०४—१०६ ॥
महर्षेर्दर्शनं चैव व्यासस्यामिततेजसः । तदाज्ञयैकचक्रायां ब्राह्मणस्य निवेशने ॥ १०७ ॥ अज्ञातचर्यया वासो यत्र तेषां प्रकीर्तितः । बकस्य निधनं चैव नागराणां च विस्मयः ॥ १०८ ॥ अमिततेजस्वी महर्षि व्यासका पाण्डवोंसे मिलना और उनकी आज्ञासे एकचक्रा नगरीमें ब्राह्मणके घर पाण्डवोंके गुप्त निवासका वर्णन है। वहीं रहते समय उन्होंने बकासुरका वध किया, जिससे नागरिकोंको बड़ा भारी आश्चर्य हुआ ॥ १०७-१०८ ॥
सम्भवश्चैव कृष्णाया धृष्टद्युम्नस्य चैव ह । ब्राह्मणात् समुपश्रुत्य व्यासवाक्यप्रचोदिताः ॥ १०९ ॥ द्रौपदीं प्रार्थयन्तस्ते स्वयंवरदिदृक्षया । पञ्चालानभितो जग्मुर्यत्र कौतूहलान्विताः ॥ ११० ॥ इसके अनन्तर कृष्णा (द्रौपदी) और उसके भाई धृष्टद्युम्नकी उत्पत्तिका वर्णन है। जब पाण्डवोंको ब्राह्मणके मुखसे यह संवाद मिला, तब वे महर्षि व्यासकी आज्ञासे द्रौपदीकी