भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 1504, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 1504

मार्कण्डेयजीने कहा— राजन्! इस विषयमें जानकार लोग उस प्राचीन इतिहासको दोहराया करते हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार अग्निदेव कुपित हो तपस्याके लिये जलमें प्रविष्ट हुए थे? ।। ६ ।। यथा च भगवानग्निः स्वयमेवाङ्गिराऽभवत् । संतापयंश्च प्रभया नाशयंस्तिमिरणि च ॥ ७ ॥ कैसे स्वयं महर्षि अंगिरा ही भगवान् अग्नि बन गये और अपनी प्रभासे अन्धकारका निवारण करते हुए जगत्‌को ताप देने लगे? ।। ७ ।। पुराङ्गिरा महाबाहो चचार तप उत्तमम् । आश्रमस्थो महाभागो हव्यवाहं विशेषयन् । तथा स भूत्वा तु तदा जगत् सर्वं व्यकाशयत् ॥ ८ ॥ महाबाहो! प्राचीन कालकी बात है, महाभाग अंगिरा ऋषि अपने आश्रममें ही रहकर उत्तम तपस्या करने लगे। वे अग्निसे भी अधिक तेजस्वी होनेके लिये यत्नशील थे। अपने उद्देश्यमें सफल होकर वे सम्पूर्ण जगत्‌को प्रकाशित करने लगे ।। ८ ।। तपश्चरंस्तु हुतभुक् संतप्तस्तस्य तेजसा । भृशं ग्लानश्च तेजस्वी न च किंचित् प्रजज्ञिवान् ॥ ९ ॥ उन्हीं दिनों अग्निदेव भी तपस्या कर रहे थे। वे तेजस्वी होकर भी अंगिराके तेजसे संतप्त हो अत्यन्त मलिन पड़ गये। परंतु इसका कारण क्या है? यह कुछ भी उनकी समझमें नहीं आया ।। ९ ।। अथ संचिन्तयामास भगवान् हव्यवाहनः । अन्योऽग्निरिह लोकानां ब्रह्मणा सम्प्रकल्पितः ॥ १० ॥ तब भगवान् अग्निने यह सोचा—'हो-न-हो, ब्रह्माजीने इस जगत्‌के लिये किसी दूसरे अग्निदेवताका निर्माण कर लिया है' ।। १० ।। अग्नित्वं विप्रणष्टं हि तप्यमानस्य मे तपः । कथमग्निः पुनरहं भवेयमिति चिन्त्य सः ॥ ११ ॥ अपश्यदग्निवल्लोकांस्तापयन्तं महामुनिम् । 'जान पड़ता है, तपस्यामें लग जानेसे मेरा अग्नित्व नष्ट हो गया। अब मैं पुनः किस प्रकार अग्नि हो सकता हूँ?' यह विचार करते हुए उन्होंने देखा कि महामुनि अंगिरा अग्निकी ही भाँति प्रकाशित हो सम्पूर्ण जगत्‌को ताप दे रहे ।। ११ १/२ ।। सोपासर्पच्छनैर्भीतस्तमुवाच तदाङ्गिराः ॥ १२ ॥ शीघ्रमेव भवस्वाग्निस्त्वं पुनर्लोकभावनः । विज्ञातश्चासि लोकेषु त्रिषु संस्थानचारिषु ॥ १३ ॥ यह देख वे डरते-डरते धीरेसे उनके पास गये। उस समय उनसे अंगिरा मुनिने कहा—'देव! आप पुनः शीघ्र ही लोकभावन अग्निके पदपर प्रतिष्ठित हो जाइये; क्योंकि तीनों

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