भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1666

उस समय गन्धर्वोंको क्रोधमें भरे हुए देख अर्जुनने भी कुपित होकर महान् दिव्यास्त्रोंका प्रयोग आरम्भ किया ॥ ६ ॥

सहस्राणां सहस्राणि प्राहिणोद् यमसादनम् ।
आग्नेयेनार्जुनः संख्ये गन्धर्वाणां बलोत्कटः ॥ ७ ॥
वे अत्यन्त बलवान् थे। उन्होंने उस युद्धमें आग्नेयास्त्रका प्रयोग करके दस लाख गन्धर्वोंको यमलोक पहुँचा दिया ॥ ७ ॥

तथा भीमो महेष्वासः संयुगे बलिनां वरः ।
गन्धर्वाञ्छतशो राजञ्जघान निशितैः शरैः ॥ ८ ॥
राजन्! इसी प्रकार बलवानोंमें श्रेष्ठ महाधनुर्धर भीमसेनने अपने तीक्ष्ण सायकोंद्वारा सैकड़ों गन्धर्वोंको मार गिराया ॥ ८ ॥

माद्रीपुत्रावपि तथा युध्यमानौ बलोत्कटौ ।
परिगृह्याग्रतो राजन् जघ्नतुः शतशः परान् ॥ ९ ॥
उत्कट बलशाली माद्रीकुमार नकुल और सहदेवने भी युद्धमें तत्पर हो सैकड़ों शत्रुओंको आगेसे पकड़कर मार डाला ॥ ९ ॥

ते वध्यमाना गन्धर्वा दिव्यैरस्त्रैर्महारथैः ।
उत्पेतुः खमुपादाय धृतराष्ट्रसुतांस्ततः ॥ १० ॥
महारथी पाण्डवोंके चलाये दिव्यास्त्रोंकी मार खाकर गन्धर्व धृतराष्ट्रके पुत्रोंको लिये-दिये आकाशमें उड़ गये ॥ १० ॥

स तानुत्पतितान् दृष्ट्वा कुन्तीपुत्रो धनंजयः ।
महता शरजालेन समन्तात् पर्यवारयत् ॥ ११ ॥
कुन्तीनन्दन अर्जुनने उन्हें आकाशमें उड़ते देख चारों ओर बाणोंका विस्तृत जाल-सा फैलाकर गन्धर्वोंको घेरेमें डाल दिया ॥ ११ ॥

ते बद्धाः शरजालेन शकुन्ता इव पञ्जरे ।
ववर्षुरर्जुनं क्रोधाद् गदाशक्त्यृष्टिवृष्टिभिः ॥ १२ ॥
उस जालमें वे उसी प्रकार बँध गये, जैसे पिंजड़ेमें पक्षी। अतः वे अत्यन्त कुपित होकर अर्जुनपर गदा, शक्ति और ऋष्टि आदि अस्त्र-शस्त्रोंकी वर्षा करने लगे ॥ १२ ॥

गदाशक्त्यृष्टिवृष्टीस्ता निहत्य परमास्त्रवित् ।
गात्राणि चाहनद् भल्लैर्गन्धर्वाणां धनंजयः ॥ १३ ॥
तब उत्तम अस्त्रोंके ज्ञाता अर्जुन उनकी गदा, शक्ति तथा ऋष्टि आदि अस्त्र-शस्त्रोंकी वर्षाका निवारण करके भल्ल नामक बाणोंद्वारा गन्धर्वोंके अंगोंपर आघात करने लगे ॥ १३ ॥

शिरोभिः प्रपतद्भिश्च चरणैर्बाहुभिस्तथा ।
अश्मवृष्टिरिवाभाति परेषांमभवद् भयम् ॥ १४ ॥