भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2119

इति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां वैयासिक्यां वनपर्वणि आरणेयपर्वणि अज्ञातवासमन्त्रणे पञ्चदशाधिकत्रिशततमोऽध्यायः ॥ ३१५ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत—व्यासनिर्मित शतसाहस्री संहिताके वनपर्वके अन्तर्गत आरणेयपर्वमें अज्ञातवासके लिये मन्त्रणाविषयक तीन सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ३१५ ॥


वनपर्वकी श्लोक-संख्या

अनुष्टुप् छन्द(अन्य बड़े छन्द)बड़े छन्दोंका ३२ अक्षरोंके अनुष्टुप् मानकर गिननेपरगद्यकुल योग
उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक—१०९३७(७८५)१०८० ।=१७१ ॥१२१८८ ॥।=
दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक—८२(४)५ ॥८७ ॥

वनपर्वकी सम्पूर्ण श्लोक-संख्या १२२७६ ।=