महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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इति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां वैयासिक्यां वनपर्वणि आरणेयपर्वणि अज्ञातवासमन्त्रणे पञ्चदशाधिकत्रिशततमोऽध्यायः ॥ ३१५ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत—व्यासनिर्मित शतसाहस्री संहिताके वनपर्वके अन्तर्गत आरणेयपर्वमें अज्ञातवासके लिये मन्त्रणाविषयक तीन सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ३१५ ॥
वनपर्वकी श्लोक-संख्या
| अनुष्टुप् छन्द | (अन्य बड़े छन्द) | बड़े छन्दोंका ३२ अक्षरोंके अनुष्टुप् मानकर गिननेपर | गद्य | कुल योग | |
|---|---|---|---|---|---|
| उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक— | १०९३७ | (७८५) | १०८० ।= | १७१ ॥ | १२१८८ ॥।= |
| दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक— | ८२ | (४) | ५ ॥ | ८७ ॥ |
वनपर्वकी सम्पूर्ण श्लोक-संख्या १२२७६ ।=