महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ
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लोमश उवाच
तेषां तदासीदुचितमिल्वलस्यैव भिक्षणम् । ततस्ते सहिता राजन्निल्वलं समुपाद्रवन् ॥ २० ॥
**लोमशजी कहते हैं—**युधिष्ठिर! उस समय उन सबको इल्वलके यहाँ याचना करना ही ठीक जान पड़ा, अतः वे एक साथ होकर इल्वलके यहाँ शीघ्रतापूर्वक गये ॥ २० ॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामगस्त्योपाख्याने अष्टनवतितमोऽध्यायः ॥ ९८ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अगस्त्योपाख्यानविषयक अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ९८ ॥