भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 1034

शक्योऽमर्षो मनुष्येण कर्तुं पुरुषमानिना ॥ ७ ॥ ‘तुम जुएमें हारे और तुम्हारी पत्नी द्रौपदीको सभामें लाया गया। इस दशामें अपनेको पुरुष माननेवाला प्रत्येक मनुष्य क्रोध कर सकता है ॥ ७ ॥

द्वादशैव तु वर्षाणि वने धिष्ण्याद् विवासितः । संवत्सरं विराटस्य दास्यमास्थाय चोषितः ॥ ८ ॥ ‘बारह वर्षोंतक तुम राज्यसे निर्वासित होकर वनमें रहे और एक वर्षतक तुम्हें राजा विराटका दास बनकर रहना पड़ा ॥ ८ ॥

अमर्षं राज्यहरणं वनवासं च पाण्डव । द्रौपद्याश्च परिक्लेशं संस्मरन् पुरुषो भव ॥ ९ ॥ ‘पाण्डुनन्दन! तुम अपने अमर्षको, राज्यके अपहरणको, वनवासको और द्रौपदीको दिये गये क्लेशको भी याद करके मर्द बनो ॥ ९ ॥

अशक्तेन च यच्छप्तं भीमसेनेन पाण्डव । दुःशासनस्य रुधिरं पीयतां यदि शक्यते ॥ १० ॥ पाण्डुपुत्र! तुम्हारे भाई भीमसेनने उस समय कुछ करनेमें असमर्थ होनेके कारण जो दुर्वचन कहा था, उसे याद करके वे आवें और यदि शक्ति हो, तो दुःशासनका रक्त पीयें ॥ १० ॥

लोहाभिसारो निर्वृत्तः कुरुक्षेत्रमकर्दमम् । समः पन्था भृतास्तेऽश्वाः श्वो युध्यस्व सकेशवः ॥ ११ ॥ ‘लोहेके अस्त्र-शस्त्रोंको बाहर निकालकर उन्हें तैयार करने आदिका कार्य पूरा हो गया है, कुरुक्षेत्रकी कीचड़ सूख गयी है, मार्ग बराबर हो गया है और तुम्हारे अश्व भी खूब पले हुए हैं; अतः कल सबेरेसे ही श्रीकृष्णके साथ आकर युद्ध करो ॥ ११ ॥

असमागम्य भीष्मेण संयुगे किं विकत्थसे । आरुरुक्षुर्यथा मन्दः पर्वतं गन्धमादनम् ॥ १२ ॥ एवं कत्थसि कौन्तेय अकत्थन् पुरुषो भव । ‘युद्धक्षेत्रमें भीष्मका सामना किये बिना ही तुम क्यों अपनी झूठी प्रशंसा करते हो? कुन्तीनन्दन! जैसे कोई अशक्त एवं मन्दबुद्धि पुरुष गन्धमादन पर्वतपर चढ़नेकी इच्छा करे, उसी प्रकार तुम भी अपने बारेमें बड़ी-बड़ी बातें किया करते हो। बातें न बनाओ; पुरुष बनो (पुरुषत्वका परिचय दो) ॥ १२ १/२ ॥

सूतपुत्रं सदुधर्षं शल्यं च बलिनां वरम् ॥ १३ ॥ द्रोणं च बलिनां श्रेष्ठं शचीपतिसमं युधि । अजित्वा संयुगे पार्थ राज्यं कथमिहेच्छसि ॥ १४ ॥ ‘पार्थ! अत्यन्त दुर्जय वीर सूतपुत्र कर्ण, बलवानोंमें श्रेष्ठ शल्य तथा युद्धमें शचीपति इन्द्रके समान पराक्रमी महाबली द्रोणको युद्धमें जीते बिना तुम यहाँ राज्य कैसे लेना चाहते