भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1218, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1218

दिव्यास्त्रवेत्ता कर्णसे जब कौरवसभामें पूछा गया, तब उसने पाँच ही दिनोंमें हमारी सेनाको नष्ट करनेकी प्रतिज्ञा कर ली ।। ६ ।। तस्मादहमपीच्छामि श्रोतुमर्जुन ते वचः । कालेन कियता शत्रून् क्षपयेरिति फाल्गुन ।। ७ ।। अतः अर्जुन! मैं भी तुम्हारी बात सुनना चाहता हूँ। फाल्गुन! तुम कितने समयमें शत्रुओंको नष्ट कर सकते हो? ।। ७ ।। एवमुक्तो गुडाकेशः पार्थिवेन धनंजयः । वासुदेवं समीक्ष्येदं वचनं प्रत्यभाषत ।। ८ ।। राजा युधिष्ठिरके इस प्रकार पूछनेपर निद्राविजयी अर्जुनने भगवान् श्रीकृष्णकी ओर देखकर यह बात कही— सर्व एते महात्मानः कृतास्त्राश्चित्रयोधिनः । असंशयं महाराज हन्युरेव न संशयः ।। ९ ।। ‘महाराज! निःसंदेह ये सभी महामना योद्धा अस्त्रविद्याके विद्वान् तथा विचित्र प्रकारसे युद्ध करनेवाले हैं। अतः उतने दिनोंमें शत्रु-सेनाको मार सकते हैं, इसमें संशय नहीं है ।। ९ ।। अपैतु ते मनस्तापो यथा सत्यं ब्रवीम्यहम् । हन्यामेकरथेनैव वासुदेवसहायवान् ।। १० ।। सामरानपि लोकांस्त्रीन् सर्वान् स्थावरजङ्गमान् । भूतं भव्यं भविष्यं च निमेषादिति मे मतिः ।। ११ ।। ‘परंतु इससे आपके मनमें संताप नहीं होना चाहिये। आपका मनस्ताप तो दूर ही हो जाना चाहिये। मैं जो सत्य बात कहने जा रहा हूँ, उसपर ध्यान दीजिये। मैं भगवान् श्रीकृष्णकी सहायतासे युक्त हुआ एकमात्र रथको लेकर ही देवताओंसहित तीनों लोकों, सम्पूर्ण चराचर प्राणियों तथा भूत, वर्तमान और भविष्यको भी पलक मारते-मारते नष्ट कर सकता हूँ। ऐसा मेरा विश्वास है ।। १०-११ ।। यत् तद् घोरं पशुपतिः प्रादादस्त्रं महन्मम । कैराते द्वन्द्वयुद्धे तु तदिदं मयि वर्तते ।। १२ ।। ‘भगवान् पशुपतिने किरातवेषमें द्वन्द्वयुद्ध करते समय मुझे जो अपना भयंकर महास्त्र प्रदान किया था, वह मेरे पास मौजूद है ।। १२ ।। यद् युगान्ते पशुपतिः सर्वभूतानि संहरन् । प्रयुङ्क्ते पुरुषव्याघ्र तदिदं मयि वर्तते ।। १३ ।। ‘पुरुषसिंह! प्रलयकालमें समस्त प्राणियोंका संहार करते समय भगवान् पशुपति जिस अस्त्रका प्रयोग करते हैं, वही यह मेरे पास विद्यमान है ।। १३ ।। तन्न जानाति गाङ्गेयो न द्रोणो न च गौतमः ।

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