महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1228, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंसब-के-सब जंगम पर्वतोंकी भाँति राजा युधिष्ठिरका अनुसरण कर रहे थे ॥ ३१-३२ ॥
एवं तस्य बलं भीमं कुन्तीपुत्रस्य धीमतः ।
यदाश्रित्याथ युयुधे धार्तराष्ट्रं सुयोधनम् ॥ ३३ ॥
इस प्रकार बुद्धिमान् कुन्तीपुत्रके पास भयंकर एवं विशाल सेना थी, जिसका आश्रय लेकर वे धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधनसे लोहा ले रहे थे ॥ ३३ ॥
ततोऽन्ये शतशः पश्चात् सहस्रायुतशो नराः ।
नर्दन्तः प्रययुस्तेषामनीकानि सहस्रशः ॥ ३४ ॥
इन सबके अतिरिक्त पीछे-पीछे लाखों पैदल मनुष्य तथा उनकी सहस्रों सेनाएँ गर्जना करती हुई आगे बढ़ रही थीं ॥ ३४ ॥
तत्र भेरीसहस्राणि शङ्खानामयुतानि च ।
न्यवादयन्त संहृष्टाः सहस्रायुतशो नराः ॥ ३५ ॥
उस समय उस रणक्षेत्रमें लाखों मनुष्य हर्ष और उत्साहमें भरकर हजारों भेरियों तथा शंखोंकी ध्वनि कर रहे थे ॥ ३५ ॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि पाण्डवसेनानिर्याणे
षण्णवत्यधिकशततमोऽध्यायः ॥ १९६ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें
पाण्डवसेनानिर्याणविषयक एक सौ छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १९६ ॥
उद्योगपर्व सम्पूर्णम्
| अनुष्टुप् छन्द | ( अन्य बड़े छन्द ) | बड़े छन्दोंको ३२ अक्षरोंके अनुष्टुप् मानकर गिननेपर | कुलयोग | |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक— | ५९७८ ॥ | ( ७८४।- ) | १०७८ ।≡ | ७०५६ ।।।= |
| दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक— | ६८ ॥ | ( ५। | ) | ७। |
| उद्योगपर्वकी सम्पूर्ण श्लोक-संख्या | ७१३३ |