महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 143, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंतथैवाक्षौहिणीं गृह्य चेदीनामृषभो बली । धृष्टकेतुरुपागच्छत् पाण्डवानमितौजसः ॥ ७ ॥ इसी प्रकार महाबली चेदिराज धृष्टकेतु अपनी एक अक्षौहिणी सेना साथ लेकर अमित तेजस्वी पाण्डवोंके पास आये ॥ ७ ॥ मागधश्च जयत्सेनो जरासन्धिर्र्महाबलः । अक्षौहिण्यैव सैन्यस्य धर्मराजमुपागमत् ॥ ८ ॥ मागध वीर जयत्सेन और जरासंधका महाबली पुत्र सहदेव—ये दोनों एक अक्षौहिणी सेनाके साथ धर्मराज युधिष्ठिरके पास आये थे ॥ ८ ॥ तथैव पाण्ड्यो राजेन्द्र सागरानूपवासिभिः । वृतो बहुविधैर्योधैर्युधिष्ठिरमुपागमत् ॥ ९ ॥ राजेन्द्र! इसी प्रकार समुद्रतटवर्ती जलप्राय देशके निवासी अनेक प्रकारके सैनिकोंसे घिरे हुए पाण्ड्यनरेश युधिष्ठिरके पक्षमें पधारे थे ॥ ९ ॥ तस्य सैन्यमतीवासीत् तस्मिन् बलसमागमे । प्रेक्षणीयतरं राजन् सुवेषं बलवत् तदा ॥ १० ॥ राजन्! उस सैन्य-समागमके समय युधिष्ठिरकी सुन्दर वेश-भूषासे विभूषित तथा प्रबल सेना, जिसकी संख्या बहुत अधिक थी, देखने ही योग्य जान पड़ती थी ॥ १० ॥