महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 144, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्रुपदस्याप्यभूत् सेना नानादेशसमागतैः । शोभिता पुरुषैः शूरैः पुत्रैश्चास्य महारथैः ॥ ११ ॥ द्रुपदकी सेना तो वहाँ पहलेसे ही उपस्थित थी, जो विभिन्न देशोंसे आये हुए शूरवीर पुरुषों तथा द्रुपदके महारथी पुत्रोंसे सुशोभित थी ॥ ११ ॥
तथैव राजा मत्स्यानां विराटो वाहिनीपतिः । पार्वतीयैर्महीपालैः सहितः पाण्डवानियात् ॥ १२ ॥ इसी प्रकार मत्स्यनरेश सेनापति विराट भी पर्वतीय राजाओंके साथ पाण्डवोंकी सहायताके लिये प्रस्तुत थे ॥ १२ ॥
इतश्चेतश्च पाण्डूनां समाजग्मुर्महात्मनाम् । अक्षौहिण्यस्तु सप्तैता विविधध्वजसंकुलाः ॥ १३ ॥ युयुत्समानाः कुरुभिः पाण्डवान् समहर्षयन् । महात्मा पाण्डवोंके पास इधर-उधरसे सात अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्र हुई थीं, जो नाना प्रकारकी ध्वजा-पताकाओंसे व्याप्त दिखायी देती थीं। ये सब सेनाएँ कौरवोंसे युद्ध करनेकी इच्छा रखकर पाण्डवोंका हर्ष बढ़ाती थीं ॥ १३ १/२ ॥
तथैव धार्तराष्ट्रस्य हर्षं समभिवर्धयन् ॥ १४ ॥ भगदत्तो महीपालः सेनामक्षौहिणीं ददौ । तस्य चीनैः किरातैश्च काञ्चनैरिव संवृतम् ॥ १५ ॥ बभौ बलमनाधृष्यं कर्णिकारवनं यथा । इसी प्रकार राजा भगदत्तने दुर्योधनका हर्ष बढ़ाते हुए उसे एक अक्षौहिणी सेना प्रदान की। सुनहरे शरीरवाले चीन और किरात देशके योद्धाओंसे भरी हुई भगदत्तकी दुर्धर्ष सेना (खिले हुए) कनेरके जंगल-सी जान पड़ती थी ॥ १४-१५ १/२ ॥
तथा भूरिश्रवाः शूरः शल्यश्च कुरुनन्दन ॥ १६ ॥ दुर्योधनमुपायातावक्षौहिण्या पृथक् पृथक् । कुरुनन्दन! इसी प्रकार शूरवीर भूरिश्रवा तथा राजा शल्य पृथक्-पृथक् एक-एक अक्षौहिणी सेना साथ लेकर दुर्योधनके पास आये ॥ १६ १/२ ॥
कृतवर्मा च हार्दिक्यो भोजान्धुकुकुरैः सह ॥ १७ ॥ अक्षौहिण्यैव सेनाया दुर्योधनमुपागमत् । हृदिकपुत्र कृतवर्मा भी भोज, अन्धक तथा कुकुरवंशी वीरोंके साथ एक अक्षौहिणी सेना लेकर दुर्योधनके पास आया ॥ १७ १/२ ॥
तस्य तैः पुरुषव्याघ्रैर्वनमालाधरैर्बलम् ॥ १८ ॥ अशोभत यथा मत्तैर्वनं प्रक्रीडितैर्गजैः । उन वनमालाधारी पुरुषसिंहोंसे कृतवर्माकी सेना उसी प्रकार सुशोभित हुई, जैसे क्रीड़ापरायण मतवाले हाथियोंसे कोई (विशाल) वन शोभा पा रहा हो ॥ १८ १/२ ॥