महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 145, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंजयद्रथमुखाश्चान्ये सिन्धुसौवीरवासिनः ॥ १९ ॥ आजग्मुः पृथिवीपालाः कम्पयन्त इवाचलान् । जयद्रथ आदि अन्य राजा, जो सिन्धु और सौवीरदेशके निवासी थे, पर्वतोंको कँपाते हुए-से दुर्योधनके पास आये ॥ १९ १/२ ॥ तेषामक्षौहिणी सेना बहुला विबभौ तदा ॥ २० ॥ विधूयमानो वातेन बहुरूप इवाम्बुदः । उनकी वह एक अक्षौहिणी विशाल सेना उस समय हवासे उड़ाये जाते हुए अनेक रूपवाले मेघके समान प्रतीत होती थी ॥ २० १/२ ॥ सुदक्षिणश्च काम्बोजो यवनैश्च शकैस्तथा ॥ २१ ॥ उपाजगाम कौरव्यमक्षौहिण्या विशाम्पते । तस्य सेनासमावायः शलभानामिवा बभौ ॥ २२ ॥ स च सम्प्राप्य कौरव्यं तत्रैवान्तर्दधे तदा । राजन्! कम्बोजनरेश सुदक्षिण भी यवनों और शकोंके साथ एक अक्षौहिणी सेना लिये दुर्योधनके पास आया। उसका सैन्य-समूह टिड्डियोंके दल-सा जान पड़ता था। वह सारा सैन्य-समुदाय कौरव-सेनामें आकर विलीन हो गया ॥ २१-२२ १/२ ॥ तथा माहिष्मतीवासी नीलो नीलायुधैः सह ॥ २३ ॥ महीपालो महावीर्यैर्दक्षिणापथवासिभिः । इसी प्रकार माहिष्मती पुरीके निवासी राजा नील भी दक्षिण देशके रहनेवाले श्यामवर्णके शस्त्रधारी महापराक्रमी सैनिकोंके साथ दुर्योधनके पक्षमें आये ॥ आवन्त्यौ च महीपालौ महाबलसुसंवृतौ ॥ २४ ॥ अक्षौहिण्या च कौरव्यं दुर्योधनमुपागतौ । अवन्तीदेशके दोनों राजा विन्द और अनुविन्द भी पृथक्-पृथक् एक अक्षौहिणी सेनासे घिरे हुए दुर्योधनके पास आये ॥ २४ १/२ ॥ केकयाश्च नरव्याघ्राः सोदर्याः पञ्च पार्थिवाः ॥ २५ ॥ संहर्षयन्तः कौरव्यमक्षौहिण्या समाद्रवन् । केकयदेशके पुरुषसिंह पाँच नरेश, जो परस्पर सगे भाई थे, दुर्योधनका हर्ष बढ़ाते हुए एक अक्षौहिणी सेनाके साथ आ पहुँचे ॥ २५ १/२ ॥ ततस्ततस्तु सर्वेषां भूमिपानां महात्मनाम् ॥ २६ ॥ तिस्रोऽन्याः समवर्तन्त वाहिन्यो भरतर्षभ । भरतश्रेष्ठ! तदनन्तर इधर-उधरसे समस्त महामना नरेशोंकी तीन अक्षौहिणी सेनाएँ और आ पहुँचीं ॥ एवमेकादशावृत्ताः सेना दुर्योधनस्य ताः ॥ २७ ॥ युयुत्समानाः कौन्तेयान् नानाध्वजसमाकुलाः ।