भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 159

यत् सत्यं तान् प्राप्य नास्तीति मन्ये । तेषां मध्ये वर्तमानस्तरस्वी धृष्टद्युम्नः पाण्डवानामिहैकः ॥ १७ ॥ सहामात्यः सोमकानां प्रबर्हः संत्यक्तात्मा पाण्डवार्थे श्रुतो मे । अजातशत्रुं प्रसहेत कोऽन्यो येषां स स्यादग्रणीर्वृष्णिसिंहः ॥ १८ ॥

यह ठीक है कि हमारी सेना सब प्रकारसे परिपूर्ण है तथापि मेरा यह विश्वास है कि यह पाण्डवोंका सामना पड़नेपर नहींके बराबर है। पाण्डवोंके पक्षमें धृष्टद्युम्न नामसे प्रसिद्ध एक बलवान् योद्धा है, जो सोमकवंशका श्रेष्ठ राजकुमार है। मैंने सुना है, उसने पाण्डवोंके लिये मन्त्रियोंसहित अपने शरीरको निछावर कर दिया है। जिन अजातशत्रु युधिष्ठिरके अगुआ अथवा नेता वृष्णिवंशके सिंह भगवान् श्रीकृष्ण हैं, उनका वेग दूसरा कौन सह सकता है? ॥ १७-१८ ॥

सहोषितश्चरितार्थो वयःस्थो मात्स्येयानामधिपो वै विराटः । स वै सपुत्रः पाण्डवार्थे च शश्वद् युधिष्ठिरं भक्त इति श्रुतं मे ॥ १९ ॥

मत्स्यदेशके राजा विराट भी अपने पुत्रोंके साथ पाण्डवोंकी सहायताके लिये सदा उद्यत रहते हैं। मैंने सुना है कि वे युधिष्ठिरके बड़े भक्त हैं। कारण यह है कि अज्ञातवासके समय वे युधिष्ठिरके साथ एक वर्ष रहे हैं और युधिष्ठिरके द्वारा उनके गोधनकी रक्षा हुई है। अवस्थामें वृद्ध होनेपर भी वे युद्धमें नौजवान-से जान पड़ते हैं ॥ १९ ॥

अवरुद्धा रथिनः केकयेभ्यो महेष्वासा भ्रातरः पञ्च सन्ति । केकयेभ्यो राज्यमाकाङ्क्षमाणा युद्धार्थिनश्चानुवसन्ति पार्थान् ॥ २० ॥

केकयदेशसे बाहर निकाले हुए पाँच भाई केकयराजकुमार महान् धनुर्धर एवं रथी वीर हैं। वे पाण्डवोंके सहयोगसे केकयदेशके राजाओंसे पुनः अपना राज्य लेना चाहते हैं, इसलिये उनकी ओरसे युद्ध करनेकी इच्छा रखकर उन्हींके साथ रह रहे हैं ॥ २० ॥

सर्वांश्च वीरान् पृथिवीपतीनां समागतान् पाण्डवार्थे निविष्टान् । शूरानहं भक्तिमतः शृणोमि प्रीत्या युक्तान् संश्रितान् धर्मराजम् ॥ २१ ॥