महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ
पृष्ठ 1770, कुल 2343 में से
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वहाँ उन वीरोंद्वारा प्रकट किया हुआ वह महान् तुमुल घोष पृथ्वी और आकाशको निनादित करने लगा ।। २९ ।।
एवमेते महाराज प्रहृष्टाः कुरुपाण्डवाः ।
पुनर्युद्धाय संजग्मुस्तापयनाः परस्परम् ।। ३० ।।
महाराज! इस प्रकार ये हर्षमें भरे हुए कौरव-पाण्डव एक-दूसरेको संताप देते हुए पुनः युद्धके लिये रणक्षेत्रमें जा पहुँचे ।। ३० ।।
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि
कौरव्यूहरचनायामेकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ।। ५१ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें कौरव-व्यूह-रचनाविषयक
इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। ५१ ।।
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३१ श्लोक हैं।]